राजसमंद में कमजोर मानसून से खरीफ फसल पर संकट, यूरिया की मांग भी घटी
राजसमंद जिले में इस बार कमजोर मानसून का असर खरीफ फसलों पर दिखाई दे रहा है। जिले में खरीफ बुआई का लक्ष्य 95,200 हेक्टेयर रखा गया था। इसके मुकाबले करीब 88,700 हेक्टेयर क्षेत्र में ही बुआई हो सकी। वहीं, 1 जनवरी से अब तक जिले में करीब 404 एमएम बारिश दर्ज हुई है। पिछले 10 वर्षों के औसत के अनुसार इस अवधि में करीब 786 एमएम बारिश अपेक्षित मानी जाती है। बारिश की कमी से वर्षा आधारित खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ी है। इसका असर खाद की मांग पर भी पड़ा है।
मक्का की सबसे ज्यादा बुआई
राजसमंद में खरीफ सीजन के दौरान सबसे ज्यादा क्षेत्र में मक्का की बुआई हुई। करीब 60,585 हेक्टेयर में मक्का बोया गया है। इसके अलावा 6,520 हेक्टेयर में ज्वार और 650 हेक्टेयर में बाजरा बोया गया।जिले में मूंग, उड़द, अरहर, तिल, मूंगफली, सोयाबीन, गन्ना, कपास और ग्वार जैसी फसलें भी बोई गई हैं। अब इन फसलों की बढ़वार काफी हद तक खेतों में मौजूद नमी पर निर्भर है।
सिंचाई वाले किसान फसल बचाने में जुटे
कम बारिश का सबसे ज्यादा असर उन किसानों पर है, जिनके पास सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। जिन किसानों के पास कुएं, ट्यूबवेल या अन्य साधन हैं, वे खेतों में पानी देकर फसल बचाने का प्रयास कर रहे हैं।वहीं वर्षा आधारित क्षेत्रों में पर्याप्त नमी नहीं होने से फसलों की बढ़वार प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे किसानों के लिए अब आगे होने वाली बारिश महत्वपूर्ण बनी हुई है।
बारिश कम तो यूरिया की मांग भी घटी
आमतौर पर बारिश के बाद खेतों में नमी बढ़ती है। इसके साथ किसान यूरिया और दूसरे उर्वरकों का इस्तेमाल बढ़ा देते हैं। लेकिन इस बार बारिश कम होने से खाद की मांग भी कमजोर हुई है।किसानों का कहना है कि जब खेत में पर्याप्त नमी नहीं है तो अतिरिक्त खाद डालने से अपेक्षित फायदा नहीं मिलेगा। हालांकि सिंचाई सुविधा वाले किसान जरूरत के मुताबिक उर्वरक खरीद रहे हैं।क्रय-विक्रय केंद्र पर यूरिया की सरकारी कीमत 266.50 रुपए प्रति बैग बताई गई है। फिलहाल केंद्र के गोदाम में 780 से अधिक बैग यूरिया उपलब्ध हैं।
25 हजार किसानों ने कराया फसल बीमा
इस खरीफ सीजन में जिले के करीब 25 हजार किसानों की फसलों का बीमा हुआ है। कृषि ऋण लेने वाले किसानों का बीमा बैंक स्तर पर किया जाता है। अन्य किसानों ने भी फसल सुरक्षा के लिए बीमा कराया है।फसल को नुकसान होने की स्थिति में योजना के निर्धारित नियमों के अनुसार बीमा लाभ दिया जाता है।
फसल खराबे का आकलन तय प्रक्रिया से
बारिश की कमी से किसी किसान की फसल खराब होने पर मुआवजा प्रक्रिया सीधे व्यक्तिगत खेत के नुकसान पर निर्भर नहीं करती। सरकारी व्यवस्था में क्रॉप कटिंग प्रयोग सहित निर्धारित मानकों के आधार पर क्षेत्रीय स्तर पर नुकसान का आकलन किया जाता है।इस वजह से किसी एक किसान की पूरी फसल खराब होने के बावजूद क्षेत्रीय मानक पूरा नहीं होने पर राहत मिलने में कठिनाई हो सकती है।
अधिकारी बोले- उपज प्रभावित होने की आशंका
कृषि अधिकारी रोशन डांगी के अनुसार इस बार बारिश कम होने से फसलों की उपज प्रभावित होने की संभावना है। हालांकि अभी अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने गेहूं की उपज पर भी असर पड़ने की संभावना जताई। अधिकारी के अनुसार जिले में फिलहाल यूरिया और अन्य उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।