भीलवाड़ा में सीवरेज के ट्रीटेड पानी से चलेगा कपड़ा उद्योग, बचेंगे लाखों लीटर भूजल
राजस्थान के भीलवाड़ा से उद्योग और पर्यावरण संरक्षण को लेकर अहम पहल सामने आई है। टेक्सटाइल प्रोसेस हाउस अब औद्योगिक जरूरतों के लिए भूजल पर निर्भरता कम करेंगे। इसके लिए नगर निगम के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से शोधित पानी का इस्तेमाल किया जाएगा। पहले चरण में चित्तौड़गढ़ रोड स्थित टेक्सटाइल क्लस्टर की 21 इकाइयों को इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। योजना लागू होने के बाद रोजाना लाखों लीटर भूजल की बचत होने की उम्मीद है।
भूजल की जगह इस्तेमाल होगा ट्रीटेड पानी
भीलवाड़ा को राजस्थान की प्रमुख टेक्सटाइल इंडस्ट्री के रूप में जाना जाता है। यहां बड़ी संख्या में प्रोसेस हाउस संचालित होते हैं। इन इकाइयों में औद्योगिक प्रक्रियाओं के लिए पानी की जरूरत होती है। अब इन जरूरतों को पूरा करने के लिए सीवरेज से शोधित पानी का उपयोग किया जाएगा।इस व्यवस्था से उद्योगों की भूजल पर निर्भरता घटेगी। साथ ही शहर के सीवरेज से निकलने वाले पानी का दोबारा उपयोग भी संभव होगा। इसे जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पहले चरण में 21 इकाइयों को मिलेगा पानी
नगर निगम ने ट्रीटेड पानी की आपूर्ति की जिम्मेदारी डिजायर एनर्जी सॉल्यूशंस को दी है। कंपनी पाइपलाइन के जरिए शोधित पानी औद्योगिक इकाइयों तक पहुंचाएगी। इसके लिए उद्योगों से नाममात्र का शुल्क लिया जाएगा।पहले चरण में चित्तौड़गढ़ रोड स्थित टेक्सटाइल क्लस्टर की 21 प्रोसेस इकाइयों को जोड़ा जा रहा है। इसके बाद योजना का विस्तार जिले के दूसरे औद्योगिक क्षेत्रों तक किया जाएगा।
रोजाना लाखों लीटर भूजल बचाने का लक्ष्य
ट्रीटेड पानी के इस्तेमाल का सबसे बड़ा फायदा भूजल संरक्षण के रूप में सामने आएगा। टेक्सटाइल इकाइयों द्वारा भूजल का इस्तेमाल कम होने से रोजाना लाखों लीटर प्राकृतिक जल स्रोत बच सकेंगे।इसके अलावा उद्योगों में पर्यावरण, सामाजिक जिम्मेदारी और प्रशासनिक अनुपालन से जुड़े ईएसजी मानकों को भी मजबूती मिलेगी। जल संरक्षण के साथ सीवरेज के पानी का बेहतर उपयोग इस मॉडल की अहम विशेषता है।
भीलवाड़ा में 60 एमएलडी तक क्षमता
भीलवाड़ा में सीवरेज ट्रीटमेंट को लेकर अलग-अलग प्लांट संचालित और निर्माणाधीन हैं। मौजूदा व्यवस्था में करीब 30 एमएलडी पानी प्रतिदिन ट्रीट किया जा रहा है।जिंदल सॉ की ओर से 10 एमएलडी क्षमता का प्लांट संचालित है। वहीं नगर निगम का 10 एमएलडी क्षमता वाला प्लांट निर्माणाधीन है। इसके अलावा जिंदल सॉ की ओर से एक और 10 एमएलडी प्लांट संचालित किया जा रहा है।बताया गया है कि कंपनी पहले से 5 से 7 एमएलडी ट्रीटेड पानी का औद्योगिक उपयोग कर रही है।
दूसरे औद्योगिक शहरों के लिए बन सकता है मॉडल
फिलहाल ट्रीट किए गए सीवरेज पानी का एक हिस्सा कोठारी नदी में छोड़ा जा रहा है। ऐसे में इसका औद्योगिक इस्तेमाल होने से पानी के पुनर्चक्रण को बढ़ावा मिलेगा।जोधपुर में भी सीवरेज के पानी को उद्योगों तक पहुंचाने की योजना पर पहले काम हुआ था। हालांकि वहां टेंडर प्रक्रिया में संवेदक नहीं मिलने से योजना आगे नहीं बढ़ सकी। ऐसे में भीलवाड़ा की पहल सफल होती है तो राजस्थान के दूसरे औद्योगिक शहर भी इस मॉडल को अपना सकते हैं।