GDP से कितनी अलग होती है GNP? देश की ग्रोथ में दोनों की क्या भूमिका
इंट्रो:
भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़ों में GDP यानी Gross Domestic Product का जिक्र अक्सर सुनने को मिलता है। हालिया आंकड़ों में अप्रैल-जून तिमाही की GDP ग्रोथ 7.8 फीसदी दर्ज की गई, जो एक साल पहले की 6.9 फीसदी वृद्धि से ज्यादा रही। हालांकि यह जनवरी-मार्च तिमाही की 8.6 फीसदी ग्रोथ से कम थी। GDP के आंकड़े देश के भीतर होने वाली आर्थिक गतिविधियों की तस्वीर दिखाते हैं। लेकिन अर्थव्यवस्था को समझने के लिए एक और महत्वपूर्ण पैमाना GNP यानी Gross National Product है। दोनों में अंतर को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि GDP उत्पादन की जगह पर फोकस करती है, जबकि GNP देश के नागरिकों और घरेलू कंपनियों की आय को ध्यान में रखती है।
GDP क्या होती है?
GDP का पूरा नाम Gross Domestic Product यानी सकल घरेलू उत्पाद है। यह किसी निश्चित अवधि के दौरान किसी देश की भौगोलिक सीमा के भीतर उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं की कुल आर्थिक वैल्यू को मापती है। यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह होती है कि उत्पादन कहां हुआ है, न कि उत्पादन करने वाली कंपनी का मालिक कौन है।
उदाहरण के लिए, अगर कोई विदेशी कंपनी भारत में फैक्ट्री लगाकर कार, इलेक्ट्रॉनिक सामान या कोई अन्य उत्पाद बनाती है, तो भारत की सीमा के भीतर होने वाला वह उत्पादन देश की GDP में शामिल होगा। इसी तरह भारत में विदेशी कंपनी द्वारा दी जाने वाली सेवाओं का उत्पादन भी GDP का हिस्सा बन सकता है।
GNP क्या होती है?
GNP का पूरा नाम Gross National Product यानी सकल राष्ट्रीय उत्पाद है। इसमें किसी देश के नागरिकों और घरेलू कंपनियों से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों और आय को महत्व दिया जाता है, चाहे वह गतिविधि देश के अंदर हो या विदेश में।
यानी GNP का फोकस यह जानने पर होता है कि किसी देश के नागरिकों और कंपनियों ने कुल कितना आर्थिक उत्पादन या आय अर्जित की। इसलिए विदेश में काम करने वाली भारतीय कंपनियों की कमाई GNP के आकलन में महत्वपूर्ण हो सकती है।
इसके उलट भारत में काम करने वाली किसी विदेशी कंपनी की कमाई को भारतीय राष्ट्रीय आय के नजरिए से GNP में उसी तरह शामिल नहीं किया जाता, क्योंकि वह विदेशी स्वामित्व से जुड़ी आय है।
GDP और GNP में सबसे बड़ा अंतर क्या है?
दोनों के बीच अंतर को एक आसान उदाहरण से समझ सकते हैं। मान लीजिए कोई अमेरिकी कंपनी भारत में फैक्ट्री लगाकर उत्पादन करती है। चूंकि उत्पादन भारत की भौगोलिक सीमा के अंदर हुआ है, इसलिए यह भारत की GDP में शामिल होगा।
लेकिन अगर कोई भारतीय कंपनी अमेरिका में फैक्ट्री चलाती है और वहां उत्पादन करती है, तो उस उत्पादन को भारत की GDP में शामिल नहीं किया जाएगा, क्योंकि उत्पादन भारत की सीमा के बाहर हुआ है। हालांकि भारतीय कंपनी से जुड़ी विदेश से प्राप्त आय GNP के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।
इस तरह आसान भाषा में कहा जा सकता है—GDP पूछती है कि उत्पादन कहां हुआ, जबकि GNP पूछती है कि आर्थिक गतिविधि किस देश के नागरिकों या कंपनियों से जुड़ी है।
GDP को क्यों माना जाता है अहम आर्थिक संकेतक?
GDP किसी देश की घरेलू अर्थव्यवस्था की स्थिति समझने का प्रमुख पैमाना है। GDP में बढ़ोतरी का मतलब आमतौर पर यह होता है कि अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादन और आर्थिक गतिविधियां बढ़ रही हैं।
मैन्युफैक्चरिंग, खेती, निर्माण, व्यापार और सर्विस सेक्टर जैसी गतिविधियां GDP को प्रभावित करती हैं। GDP की मजबूत ग्रोथ से निवेशकों को भी अर्थव्यवस्था की संभावित दिशा के बारे में संकेत मिल सकते हैं।
सरकारें भी GDP के आंकड़ों का इस्तेमाल आर्थिक नीतियां बनाने और अर्थव्यवस्था की स्थिति का आकलन करने के लिए करती हैं। कंपनियां बाजार में मांग और कारोबार बढ़ाने की संभावनाओं को समझने के लिए भी आर्थिक विकास के आंकड़ों पर नजर रखती हैं।
GDP बढ़ने से रोजगार पर क्या असर पड़ सकता है?
अगर किसी देश में आर्थिक गतिविधियां तेज होती हैं तो इसका असर रोजगार पर भी पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, किसी फैक्ट्री में उत्पादन बढ़ने पर अतिरिक्त कर्मचारियों की जरूरत हो सकती है। इसी तरह निर्माण, परिवहन, व्यापार और सर्विस सेक्टर में गतिविधियां बढ़ने पर रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
हालांकि GDP की ग्रोथ और रोजगार के बीच सीधा और समान संबंध हर स्थिति में नहीं होता। उत्पादन बढ़ने के बावजूद अगर अर्थव्यवस्था में ऑटोमेशन या पूंजी-आधारित तकनीक का इस्तेमाल ज्यादा हो रहा हो तो रोजगार वृद्धि अपेक्षाकृत कम भी रह सकती है।
GNP देश की वैश्विक कमाई की तस्वीर देती है
GNP किसी देश के नागरिकों और घरेलू कंपनियों की विदेश से होने वाली आय को समझने में उपयोगी हो सकती है। यह खासतौर पर उन अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण है जहां बड़ी संख्या में नागरिक विदेशों में काम करते हैं या घरेलू कंपनियों का कारोबार दूसरे देशों में फैला हुआ है।
भारत के लाखों नागरिक विदेशों में काम करते हैं और अपने परिवारों को पैसा भेजते हैं। विदेश से आने वाली ऐसी कमाई देश की बाहरी आर्थिक स्थिति के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि विदेश में किया गया उत्पादन भारत की GDP का हिस्सा नहीं होता, लेकिन भारतीय कंपनियों या नागरिकों से जुड़ी विदेश से प्राप्त आय राष्ट्रीय आय की तस्वीर को प्रभावित कर सकती है।
GDP और GNP में कौन ज्यादा महत्वपूर्ण है?
GDP और GNP में से किसी एक को हर परिस्थिति में ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं कहा जा सकता। दोनों अलग-अलग पहलुओं को मापते हैं।
GDP देश की भौगोलिक सीमा के भीतर होने वाली आर्थिक गतिविधियों और उत्पादन की स्थिति बताती है, जबकि GNP देश के नागरिकों और घरेलू कंपनियों की कुल आर्थिक आय या उत्पादन से जुड़ी तस्वीर पेश करती है।
इसलिए किसी देश की घरेलू अर्थव्यवस्था, उत्पादन और विकास दर समझने के लिए GDP बेहद उपयोगी है। वहीं विदेशों से होने वाली आय और देश के नागरिकों व कंपनियों की वैश्विक आर्थिक क्षमता को समझने के लिए GNP अलग नजरिया देती है।