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बारिश में श्मशान घाट पर भी संघर्ष, 2 घंटे त्रिपाल के नीचे रहा शव

इंट्रो: बारां जिले के अंता क्षेत्र के डाबरी काकाजी गांव से सामने आई तस्वीर ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के दावों पर सवाल खड़े करती है। गांव के श्मशान घाट पर टिनशेड नहीं होने के कारण बारिश के दौरान अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे परिवार और ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बारिश शुरू होने पर शव को भीगने से बचाने के लिए करीब दो घंटे तक त्रिपाल और डंडों का सहारा लेना पड़ा। चिता के लिए जुटाई गई लकड़ियां भी बारिश में भीग गईं। ग्रामीणों ने किसी तरह व्यवस्था संभालकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की और प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग की।

बारिश शुरू होते ही बढ़ी मुश्किल

डाबरी काकाजी गांव में एक परिवार अंतिम संस्कार के लिए शव लेकर श्मशान घाट पहुंचा था। इसी दौरान अचानक बारिश शुरू हो गई। श्मशान स्थल पर पक्का टिनशेड नहीं होने के कारण शव को बारिश से बचाने के लिए ग्रामीणों को तत्काल वैकल्पिक इंतजाम करना पड़ा। ग्रामीणों ने त्रिपाल और डंडों की मदद से शव को ढक दिया। बारिश लगातार जारी रहने के कारण करीब दो घंटे तक इसी तरह शव को सुरक्षित रखने की कोशिश होती रही। इस दौरान परिवार के लोगों के साथ ग्रामीण भी व्यवस्था संभालने में जुटे रहे।

त्रिपाल के सहारे बचाई चिता

बारिश के कारण अंतिम संस्कार की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई। चिता के लिए रखी गई लकड़ियां भीग जाने से ग्रामीणों की मुश्किल और बढ़ गई। ग्रामीणों ने त्रिपाल लगाकर चिता को बारिश से बचाने का प्रयास किया। मौसम साफ होने का इंतजार करने के साथ-साथ लकड़ियों को दोबारा व्यवस्थित किया गया। काफी मशक्कत के बाद किसी तरह अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी हो सकी। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान ग्रामीणों में श्मशान घाट की बदहाल व्यवस्था को लेकर नाराजगी नजर आई। उनका कहना था कि अंतिम संस्कार जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए भी ऐसी परेशानी नहीं होनी चाहिए।

लंबे समय से टिनशेड की मांग

ग्रामीणों का दावा है कि श्मशान घाट पर टिनशेड और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग लंबे समय से की जा रही है। इसके बावजूद अब तक स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी। ग्रामीणों के मुताबिक बारिश और गर्मी जैसे मौसम में अंतिम संस्कार करना बेहद मुश्किल हो जाता है। उनका कहना है कि श्मशान घाट ऐसी जगह है जहां कम से कम मौसम से बचाव के लिए पक्का टिनशेड, रास्ता और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए। ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से इस समस्या का जल्द समाधान कराने की मांग की है।

विकास के दावों पर खड़े हुए सवाल

डाबरी काकाजी गांव से सामने आया यह मामला ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और मूलभूत सुविधाओं को लेकर किए जाने वाले दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़ा करता है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव से विधायक, प्रधान और सरपंच जैसे जनप्रतिनिधि रहे हैं, फिर भी श्मशान घाट जैसी जरूरी जगह पर पर्याप्त सुविधा नहीं होना चिंता की बात है। अंतिम संस्कार के दौरान मौसम की मार झेलना किसी भी परिवार के लिए बेहद कठिन परिस्थिति होती है। ऐसे में ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन केवल आश्वासन तक सीमित न रहे, बल्कि जल्द निर्माण कार्य शुरू कर स्थायी समाधान सुनिश्चित करे।

ग्रामीणों ने प्रशासन से की तत्काल कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने श्मशान घाट पर जल्द से जल्द पक्का टिनशेड बनवाने की मांग की है, ताकि बारिश या तेज धूप के दौरान अंतिम संस्कार में किसी तरह की बाधा न आए। उनका कहना है कि किसी परिवार को दोबारा शव को त्रिपाल के नीचे रखने जैसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़े। ग्रामीणों के अनुसार श्मशान घाट पर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन और स्थानीय निकाय की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। अब देखना होगा कि सामने आई तस्वीर और ग्रामीणों की शिकायत के बाद संबंधित प्रशासन इस समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाता है।

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Stv News Rajasthan

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