जीडी कॉलेज छात्रावास बदहाल, पानी में मच्छर और टूटे शौचालय से छात्राएं परेशान
इंट्रो: अलवर के गौरी देवी महिला महाविद्यालय यानी जीडी कॉलेज के छात्रावास में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति को लेकर छात्राओं में नाराजगी है। करीब 80 छात्राओं के रहने वाले हॉस्टल में सफाई, पेयजल, शौचालय और सुरक्षा से जुड़ी कई समस्याएं सामने आई हैं। छात्राओं का आरोप है कि पीने के पानी के पात्रों में मच्छर और कचरा दिखाई देता है, जबकि बाथरूम के बाहर फर्श पर शैवाल की मोटी परत जमने से फिसलने का खतरा बना रहता है। कई खिड़कियां और दरवाजे क्षतिग्रस्त हैं तथा शौचालय का गेट ठीक से बंद नहीं होता। छात्राओं का कहना है कि फीस बढ़ने के बावजूद सुविधाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
करीब 80 छात्राएं, लेकिन सुविधाओं का अभाव
गौरी देवी महिला महाविद्यालय के छात्रावास में करीब 80 छात्राएं रह रही हैं। छात्राओं के मुताबिक हॉस्टल में रहने के लिए जरूरी कई बुनियादी सुविधाएं लंबे समय से परेशानी का कारण बनी हुई हैं। सफाई व्यवस्था कमजोर होने के कारण परिसर में जगह-जगह गंदगी दिखाई देती है। छात्राओं का कहना है कि नियमित सफाई और रखरखाव की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। बाथरूम तक जाने वाले रास्ते पर भी गंदगी और फिसलन की समस्या बनी हुई है। छात्राओं ने कई बार कॉलेज प्रशासन को समस्याओं से अवगत कराने की बात कही है, लेकिन उनका कहना है कि कई शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान अभी तक नहीं हो पाया है।
पानी के पात्रों में मच्छर और कचरा मिलने का दावा
हॉस्टल में पेयजल व्यवस्था को लेकर छात्राओं ने गंभीर शिकायतें की हैं। उनका कहना है कि जिस पानी का इस्तेमाल पीने के लिए किया जाता है, उसके पात्रों में मच्छर और कचरा दिखाई देता है। गर्मी और उमस के मौसम में स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दूषित पानी से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम की आशंका भी बनी रहती है। छात्राओं का कहना है कि पानी की नियमित सफाई और उसकी गुणवत्ता की जांच पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि समस्या की जानकारी जिम्मेदारों तक पहुंचाने के बावजूद अब तक स्थायी सुधार नहीं हुआ है।
बाथरूम के बाहर शैवाल, फिसलने का खतरा
छात्रावास के बाथरूम के बाहर फर्श पर शैवाल की मोटी परत जमा होने की शिकायत भी सामने आई है। नमी और गंदगी के कारण फर्श पर लगातार फिसलन बनी रहती है। छात्राओं को रोजाना इसी रास्ते से होकर बाथरूम तक जाना पड़ता है। ऐसे में किसी छात्रा के फिसलकर घायल होने की आशंका बनी हुई है। छात्राओं ने फर्श की तत्काल सफाई कराने और नियमित रखरखाव की मांग की है। उनका कहना है कि हॉस्टल जैसी जगह पर साफ-सफाई केवल सुविधा का विषय नहीं, बल्कि छात्राओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य से भी जुड़ा मामला है। इसलिए ऐसी समस्याओं का समय पर समाधान जरूरी है।
टूटी खिड़कियां और शौचालय का गेट भी खराब
हॉस्टल भवन में कई जगह खिड़कियां क्षतिग्रस्त होने की बात भी सामने आई है। परिसर में कुछ स्थानों पर कचरा जमा होने की शिकायत है। वहीं शौचालय के गेट की स्थिति भी खराब बताई गई है और वह ठीक से बंद नहीं हो पाता। छात्राओं के अनुसार कई दरवाजों में कुंदी तक नहीं है। इससे उन्हें असुविधा के साथ सुरक्षा को लेकर भी चिंता रहती है। छात्राओं का कहना है कि छात्रावास में रहने वाली छात्राओं के लिए निजी स्थान और सुरक्षित माहौल बेहद जरूरी है। ऐसे में टूटे दरवाजे, खराब कुंदियां और क्षतिग्रस्त खिड़कियों की मरम्मत प्राथमिकता के आधार पर कराई जानी चाहिए।
11 हजार से बढ़कर 14 हजार हुई हॉस्टल फीस
छात्राओं ने छात्रावास शुल्क में बढ़ोतरी को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार हॉस्टल फीस 11 हजार रुपए से बढ़ाकर 14 हजार रुपए कर दी गई है। यानी छात्राओं पर तीन हजार रुपए का अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ा है। छात्राओं का कहना है कि फीस बढ़ने के बावजूद हॉस्टल की मूलभूत सुविधाओं में उसी अनुपात में सुधार नजर नहीं आ रहा। इसके अलावा कॉशन मनी को लेकर भी छात्राओं ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि पहले यह राशि केवल प्रथम वर्ष में जमा कराई जाती थी, जबकि अब तीनों वर्षों के लिए कॉशन मनी लिए जाने की बात कही जा रही है। छात्राएं इस व्यवस्था पर स्पष्टीकरण चाहती हैं।
वार्डन निवास भी जर्जर हालत में
छात्रावास परिसर में वार्डन के लिए बना निवास भी खराब स्थिति में बताया जा रहा है। भवन की हालत ऐसी होने की बात कही गई है कि वहां रहने के लिए कोई तैयार नहीं है। कॉलेज प्रशासन के अनुसार वार्डन निवास की मरम्मत के लिए यूजीसी को 5 लाख 58 हजार रुपए का प्रस्ताव भेजा गया है। प्रशासन का कहना है कि राशि स्वीकृत होकर मिलने के बाद भवन की मरम्मत कराई जाएगी। इससे यह सवाल भी उठता है कि जब तक बजट उपलब्ध नहीं होता, तब तक छात्रावास की सुरक्षा और रखरखाव से जुड़ी आवश्यक व्यवस्थाएं कैसे सुनिश्चित की जाएंगी। छात्राओं को तत्काल समाधान की उम्मीद है।
प्राचार्य बोले- समस्याओं का समाधान कराया जाएगा
जीडी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सत्यभाव यादव ने कहा कि उन्होंने हाल ही में कार्यभार संभाला है। उनके अनुसार अधूरे कार्यों को पूरा कराने के लिए ठेकेदार को बुलाकर आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। प्राचार्य ने बताया कि छात्राओं के साथ अब तक चार बैठकें हो चुकी हैं और उनकी समस्याओं को समझने के बाद समाधान की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि छात्रावास की व्यवस्थाओं में सुधार कराया जाएगा। अब देखना होगा कि प्रशासन की ओर से दिए गए आश्वासन के बाद पेयजल, सफाई, शौचालय, सुरक्षा और भवन की मरम्मत से जुड़ी समस्याओं का समाधान कितनी जल्दी होता है।