संसद के मानसून सत्र पर TMC का हमला, मोदी-शाह पर साधा निशाना
इंट्रो: संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिन विपक्ष ने सरकार पर सदन की कार्यवाही और महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर गंभीरता नहीं दिखाने का आरोप लगाया। तृणमूल कांग्रेस सांसद सागरिका घोष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर पूरे सत्र के दौरान संसद से दूरी बनाए रखने और विपक्ष की मांगों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार NEET परीक्षा और उससे जुड़े आंदोलन सहित युवाओं पर पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों पर चर्चा की मांग करता रहा, लेकिन प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सदन में चर्चा के लिए नहीं आए। कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने भी सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि गृह मंत्री चर्चा के लिए तैयार थे, तो पहले इतने दिनों तक सदन में क्यों नहीं आए।
TMC ने मोदी-शाह पर लगाया संसद की अनदेखी का आरोप
मानसून सत्र के समापन पर तृणमूल कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। TMC सांसद सागरिका घोष ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने पूरे सत्र के दौरान संसद और उसकी संस्थागत भूमिका के प्रति कथित तौर पर अनादरपूर्ण रवैया अपनाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष पिछले कई सप्ताह से लगातार मांग करता रहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सदन में आएं और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा में हिस्सा लें। घोष के मुताबिक विपक्ष ने सदन के भीतर अपनी बात रखने की कोशिश की, लेकिन सरकार की ओर से अपेक्षित जवाब नहीं मिला। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक जवाबदेही से जोड़ते हुए सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए।
NEET और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की मांग
सागरिका घोष ने कहा कि विपक्ष ने मानसून सत्र के दौरान NEET परीक्षा और इससे जुड़े छात्रों के आंदोलन का मुद्दा उठाने की मांग की थी। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष युवाओं से जुड़े गंभीर सवालों पर सरकार का पक्ष सदन में सुनना चाहता था। घोष ने युवाओं पर पुलिस कार्रवाई और कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़े मुद्दे पर भी चर्चा की मांग का उल्लेख किया। उनके अनुसार इन मुद्दों का सीधा संबंध विद्यार्थियों और युवाओं से था, इसलिए संसद में इन पर गंभीर चर्चा जरूरी थी। TMC सांसद ने आरोप लगाया कि विपक्ष की मांगों के बावजूद प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सदन में चर्चा के लिए उपस्थित नहीं हुए।
‘बाद में चर्चा के लिए तैयार होने की बात’ पर सवाल
TMC सांसद ने सरकार के उस रुख पर भी सवाल उठाया, जिसमें बाद के चरण में चर्चा के लिए तैयार होने की बात कही गई। सागरिका घोष ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में इन मुद्दों पर चर्चा को लेकर गंभीर थी, तो विपक्ष की लगातार मांगों के दौरान ही सदन में संवाद होना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे सत्र के दौरान जनता से जुड़े मुद्दों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। घोष के मुताबिक अंत में चर्चा के लिए तैयार होने की बात कहना सरकार की गंभीरता पर सवाल खड़े करता है। हालांकि यह विपक्ष का राजनीतिक आरोप है और सरकार की ओर से इस पर अलग पक्ष रखा जा सकता है।
कांग्रेस ने भी अमित शाह की अनुपस्थिति पर उठाए सवाल
मानसून सत्र के आखिरी दिन कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने भी गृह मंत्री अमित शाह की सदन में उपस्थिति को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार चर्चा के लिए तैयार थी, तो पिछले कई दिनों के दौरान सदन में चर्चा क्यों नहीं हुई। औजला ने सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि गृह मंत्री संसद परिसर में मौजूद होने के बावजूद सदन की कार्यवाही में सक्रिय रूप से शामिल क्यों नहीं हुए। कांग्रेस सांसद के अनुसार विपक्ष की जिम्मेदारी सरकार के सामने जनता से जुड़े मुद्दे उठाना है और सरकार की जिम्मेदारी उन मुद्दों पर जवाब देना तथा आवश्यक कार्रवाई करना है।
‘पिछले 20 दिनों से क्या कर रहे थे?’—कांग्रेस
गुरजीत सिंह औजला ने गृह मंत्री के कथित तौर पर चर्चा के लिए तैयार होने वाले रुख पर सवाल करते हुए कहा कि यदि आखिरी दिन चर्चा के लिए तैयार थे, तो पहले के दिनों में क्या किया जा रहा था। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष लगातार मुद्दे उठाता रहा, लेकिन सरकार की ओर से अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली। औजला ने सत्तारूढ़ दल को संसद में बने गतिरोध के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि विपक्ष का काम जनता से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाना है, जबकि सरकार को उन पर संज्ञान लेकर जवाब देना चाहिए। उनके बयान में राहुल गांधी द्वारा उठाए गए मुद्दों का भी उल्लेख किया गया।
मानसून सत्र में गतिरोध रहा बड़ा मुद्दा
इस बार संसद का मानसून सत्र कई मुद्दों को लेकर लगातार हंगामे और राजनीतिक टकराव के बीच चला। विपक्ष ने NEET, छात्रों के आंदोलन और पुलिस कार्रवाई समेत कई विषयों पर चर्चा की मांग की, जबकि सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने के आरोप लगाए। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के कारण कई मौकों पर कार्यवाही प्रभावित हुई। सत्र के आखिरी दिन भी राजनीतिक बयानबाजी जारी रही। TMC और कांग्रेस के ताजा आरोपों ने एक बार फिर सरकार और विपक्ष के बीच जवाबदेही तथा संसद में चर्चा को लेकर जारी मतभेद को सामने ला दिया है।
सरकार और विपक्ष के दावों के बीच बढ़ी सियासी तल्खी
मानसून सत्र के अंत में विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की सदन में मौजूदगी को लेकर सवाल उठाए जाने से सियासी बहस तेज हो गई है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को महत्वपूर्ण जन मुद्दों पर संसद में जवाब देना चाहिए, जबकि सत्ता पक्ष का रुख सदन की कार्यवाही और चर्चा को लेकर अलग रहा है। अब सत्र समाप्त होने के बाद भी NEET और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बहस जारी रहने के आसार हैं। विपक्ष के आरोपों के बीच सरकार की ओर से दिए जाने वाले जवाब और इन मुद्दों पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण रहेगी।