जयपुर में 100 शहीद परिवारों का धरना, बोले- सम्मान नहीं दे सकते तो मेडल वापस लें
जयपुर में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के करीब 100 शहीद जवानों के परिजनों ने अपने अधिकारों और समान सुविधाओं की मांग को लेकर धरना दिया। सोमवार को परिजन शहीद स्मारक पहुंचे और राजस्थान सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि 1 अप्रैल 1999 के बाद शहीद हुए अर्द्धसैनिक बलों के जवानों के परिवारों को मिलने वाली सुविधाओं की तुलना में उससे पहले शहीद हुए जवानों के परिवारों को समान अधिकार नहीं मिल रहे हैं। परिजनों ने वीरांगनाओं की पेंशन, बच्चों को सरकारी नौकरी और कृषि भूमि व भूखंड आवंटन से जुड़ी नीतियों में समानता की मांग की।
शहीद परिवारों ने शहीद स्मारक पर दिया धरना
सोमवार को CAPF के करीब 100 शहीद जवानों के परिजन जयपुर स्थित शहीद स्मारक पहुंचे। यहां उन्होंने अपनी मांगों को लेकर धरना दिया।परिजनों ने कहा कि उनके परिवार के जवानों ने देश की सुरक्षा में सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। इसके बावजूद अलग-अलग समय में शहीद हुए जवानों के परिवारों के लिए अलग-अलग प्रावधान होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
1 अप्रैल 1999 की नीति पर सवाल
धरने में शामिल परिजनों ने 1 अप्रैल 1999 के बाद शहीद हुए अर्द्धसैनिक बलों के जवानों को मिलने वाले दर्जे और सुविधाओं का मुद्दा उठाया।उनका आरोप है कि इससे पहले शहीद हुए जवानों के परिवारों को समान स्तर की सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। परिजनों ने सरकार से इस अंतर को खत्म कर सभी शहीद परिवारों के लिए समान नीति लागू करने की मांग की।उनका कहना है कि शहादत की तारीख के आधार पर परिवारों के अधिकारों में अंतर नहीं होना चाहिए।
वीरांगनाओं की पेंशन में समानता की मांग
शहीद परिवारों ने वीरांगनाओं को मिलने वाली पेंशन से जुड़े प्रावधानों में भी समानता की मांग उठाई।परिजनों का कहना है कि शहीद जवानों की पत्नियों को सम्मानजनक और समान पेंशन मिलनी चाहिए। उनका आरोप है कि अलग-अलग श्रेणियों के कारण कई परिवारों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।उन्होंने सरकार से इस मामले की समीक्षा कर समान व्यवस्था लागू करने की मांग की।
शहीदों के बच्चों को सरकारी नौकरी की मांग
धरने में शहीद जवानों के बच्चों के लिए सरकारी नौकरी का मुद्दा भी उठाया गया।परिजनों का कहना है कि शहीद परिवारों के बच्चों को रोजगार से जुड़ी सुविधाओं में भी समानता मिलनी चाहिए। उनका तर्क है कि परिवार के सदस्य की शहादत के बाद बच्चों की शिक्षा और भविष्य की जिम्मेदारी सरकार की नीतियों में पर्याप्त रूप से दिखाई देनी चाहिए।
जमीन और भूखंड आवंटन में भी समान अधिकार
शहीद परिवारों ने कृषि भूमि और भूखंड आवंटन से जुड़ी नीतियों में भी समानता की मांग की।परिजनों के मुताबिक, अलग-अलग समय में शहीद हुए जवानों के परिवारों के लिए भूमि और आवास से जुड़े प्रावधान अलग हैं। उन्होंने सभी शहीद परिवारों के लिए एक समान नीति बनाने की मांग की है।
‘सम्मान नहीं दे सकते तो मेडल वापस लें’
धरने के दौरान परिजनों ने सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यदि सरकार शहीद परिवारों को उनके अधिकार और सम्मान नहीं दे सकती तो उनके मेडल वापस ले ले।परिजनों का कहना था कि शहीदों का सम्मान केवल समारोहों और कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उनके मुताबिक, सम्मान का वास्तविक अर्थ परिवारों को अधिकार और सुविधाएं देना भी है।
बोले- विशेष सुविधा नहीं, समान अधिकार चाहिए
धरने में शामिल परिवारों ने कहा कि वे सरकार से कोई विशेष या अतिरिक्त सुविधा नहीं मांग रहे हैं।उनकी मांग है कि देश की सुरक्षा में शहीद हुए सभी जवानों के परिवारों के साथ समान व्यवहार किया जाए। परिजनों ने सरकार से मौजूदा नीतियों की समीक्षा कर उनके अधिकारों को स्पष्ट करने की मांग की।
सरकार से जल्द कार्रवाई की मांग
शहीद परिवारों ने राजस्थान सरकार से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि लंबे समय से उठाए जा रहे मुद्दों का समाधान बातचीत और नीति में बदलाव के जरिए किया जाना चाहिए।परिजनों ने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम उठाएगी और शहीद परिवारों के बीच सुविधाओं को लेकर मौजूद अंतर को दूर करेगी।