मानसून सत्र में ‘अंतिम दांव’! महिला आरक्षण, परिसीमन और FCRA पर घमासान
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के अब केवल चार कार्यदिवस शेष हैं, लेकिन कई अहम मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध बना हुआ है। महिला आरक्षण, परिसीमन और विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी FCRA से जुड़े प्रस्तावित बदलावों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। सोमवार, 10 अगस्त की लोकसभा कार्यसूची में इन प्रमुख विधेयकों को जगह नहीं मिलने से इनके भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं, विपक्ष ने कुछ प्रस्तावित कानूनों का खुलकर विरोध करने के संकेत दिए हैं। ऐसे में सत्र के बचे दिनों में सरकार के सामने महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने की चुनौती होगी।
चार विधेयक लोकसभा की कार्यसूची में शामिल
10 अगस्त की लोकसभा कार्यसूची में चार विधेयकों को शामिल किया गया है। इनमें न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2026, खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026, केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल हैं। हालांकि महिला आरक्षण, परिसीमन और FCRA से जुड़े प्रस्तावित विधेयक इस सूची में शामिल नहीं हैं। इससे यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार इन विषयों पर इसी सत्र में आगे बढ़ेगी या नहीं। सत्र के सीमित कार्यदिवसों को देखते हुए अब हर दिन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
महिला आरक्षण और परिसीमन पर सियासी नजर
महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों को लेकर सरकार ने विपक्षी दलों से संपर्क साधा है। इसके बाद कुछ विपक्षी दलों के रुख में नरमी के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन प्रमुख विपक्षी दलों के बीच इस मुद्दे पर अभी सहमति नहीं बन पाई है। इन दोनों विषयों का सीधा संबंध भविष्य के चुनावी प्रतिनिधित्व और निर्वाचन क्षेत्रों की संरचना से जुड़ा है। यही वजह है कि राजनीतिक दल इस पर बेहद सावधानी से अपना रुख तय कर रहे हैं। संसद के बचे हुए दिनों में इन प्रस्तावों को लेकर बातचीत और राजनीतिक दबाव दोनों बढ़ने की संभावना है।
FCRA बिल पर कांग्रेस ने जताया कड़ा विरोध
विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी FCRA में प्रस्तावित संशोधन को लेकर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा है कि यदि केंद्र सरकार इस विधेयक को संसद में पेश करती है तो कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसका पुरजोर विरोध करेंगे। उन्होंने प्रस्तावित बदलावों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इससे अल्पसंख्यकों और गैर-सरकारी संगठनों पर असर पड़ सकता है। कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को संसद के भीतर मजबूती से उठाएगी और विधेयक को पारित होने से रोकने का प्रयास करेगी।
सरकार के सामने सीमित समय में बड़ी चुनौती
मानसून सत्र के केवल चार कार्यदिवस बचे होने के कारण सरकार के पास महत्वपूर्ण विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए समय बेहद सीमित है। एक तरफ लोकसभा की कार्यसूची में शामिल विधेयकों पर काम होना है, तो दूसरी ओर महिला आरक्षण, परिसीमन और FCRA जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में हैं। विपक्ष के विरोध और संसद में जारी गतिरोध के बीच सरकार को रणनीति बनानी होगी। अब नजर इस बात पर है कि सत्र के अंतिम दिनों में कौन से विधेयक सदन में आते हैं और किन मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बन पाती है।