ममता बनर्जी का बीजेपी पर तीखा हमला, बैंक खाते फ्रीज करने से लेकर RSS फंडिंग तक उठाए सवाल
तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर कई राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी के बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं, जबकि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में मुख्यमंत्री के रूप में वेतन या पेंशन नहीं ली। साथ ही उन्होंने आरएसएस की फंडिंग और मंदिरों के दान से जुड़े मुद्दों पर भी सवाल उठाए। इन दावों पर संबंधित पक्षों की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बैंक खाते और निजी आय का किया जिक्र
ममता बनर्जी ने कहा कि वह अपनी पुस्तकों की रॉयल्टी से निजी खर्च चलाती हैं और इस वर्ष उन्हें रॉयल्टी की राशि भी नहीं मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं, जिससे संगठन के कामकाज पर असर पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए कभी वेतन या पेंशन नहीं ली। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा और आरएसएस की आर्थिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि इन मामलों में भी पारदर्शिता होनी चाहिए।
RSS और फंडिंग को लेकर उठाए सवाल
टीएमसी प्रमुख ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आरएसएस के पंजीकरण और फंडिंग व्यवस्था पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों के साथ अलग व्यवहार किया जाता है, जबकि अन्य संगठनों की वित्तीय व्यवस्था पर समान स्तर की जांच नहीं होती। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के लिए एक समान नियम लागू होने चाहिए।
मंदिरों के दान और सुरक्षा व्यवस्था पर टिप्पणी
अपने संबोधन में ममता बनर्जी ने विभिन्न मंदिरों में दान पात्रों से कथित चोरी की घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि हाल के महीनों में पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में मंदिरों से धन चोरी की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक मुद्दों पर राजनीति करने के बजाय सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है।
युवाओं और विपक्ष के मुद्दे भी उठाए
ममता बनर्जी ने विरोध प्रदर्शन कर रहे युवाओं का भी जिक्र करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों को देशविरोधी बताना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन में शामिल युवाओं और उनके परिवारों पर दबाव बनाया जा रहा है। उनके अनुसार लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना नागरिकों का अधिकार है और सरकार को विपक्ष तथा आंदोलनों की आवाज सुननी चाहिए। फिलहाल उनके इन आरोपों पर भाजपा या आरएसएस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।