हनुमानगढ़ में अनोखा राजनीतिक घटनाक्रम, थानाधिकारी को हटाने की मांग पर BJP, कांग्रेस और CPM एक मंच पर
राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में एक ऐसा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जहां आमतौर पर एक-दूसरे के विरोधी माने जाने वाले भाजपा, कांग्रेस और माकपा (CPM) एक ही मुद्दे पर साथ नजर आए। पीलीबंगा थानाधिकारी राय सिंह के खिलाफ निष्पक्ष जांच और उन्हें पद से हटाने की मांग को लेकर तीनों दलों के नेताओं ने सामाजिक संगठनों के साथ पुलिस प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो 6 अगस्त से थाना परिसर के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत 2 अगस्त को हुई, जब पीलीबंगा अस्पताल के पास पुलिस ने पूर्व पंचायत समिति सदस्य और भाजपा नेता दीपक धारणिया के वाहन को रोककर तलाशी ली। आरोप है कि इस दौरान सार्वजनिक स्थान पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। घटना के समय दीपक धारणिया एक सामाजिक कार्यक्रम से लौट रहे थे, जिसमें कई प्रमुख जनप्रतिनिधि और बिश्नोई समाज के लोग भी मौजूद थे। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बिना पर्याप्त कारण की गई कार्रवाई से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। हालांकि, पुलिस की ओर से इस मामले में विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
तीनों दलों ने मिलकर सौंपा ज्ञापन
सोमवार को भाजपा, कांग्रेस और माकपा के जिला पदाधिकारियों के साथ विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पीलीबंगा थानाधिकारी के खिलाफ निष्पक्ष जांच कराने और आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की गई। तीनों दलों का एक मंच पर आना जिले की राजनीति में असाधारण घटनाक्रम माना जा रहा है। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोष तय किया जाना चाहिए।
कार्रवाई नहीं हुई तो 6 अगस्त से धरने की चेतावनी
प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो 6 अगस्त से पीलीबंगा थाना परिसर के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा। आंदोलन में बिश्नोई समाज और अन्य सामाजिक संगठनों की भागीदारी की भी घोषणा की गई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी मांग केवल निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की है तथा जब तक इस पर निर्णय नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
अब प्रशासन के फैसले पर टिकी निगाहें
इस पूरे घटनाक्रम के बाद जिले का राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी एक प्रशासनिक मुद्दे पर भाजपा, कांग्रेस और माकपा का एक साथ आना दुर्लभ स्थिति है। अब सभी की नजर पुलिस प्रशासन पर है कि वह शिकायत की जांच के बाद क्या कदम उठाता है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला तो 6 अगस्त से प्रस्तावित धरना जिले की राजनीति और कानून-व्यवस्था दोनों के लिए महत्वपूर्ण विषय बन सकता है।