सफलता से सन्यास तक: ‘चायवालाज’ के फाउंडर रोहित शर्मा की रहस्यमयी मौत ने खड़े किए कई सवाल
राजस्थान के दौसा से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। महज 30 साल की उम्र में सफलता की ऊंचाइयों को छूने वाले ‘चायवालाज’ स्टार्टअप के फाउंडर रोहित शर्मा अब इस दुनिया में नहीं रहे। उनका शव उनके ही घर में फंदे से लटका हुआ मिला—और इसके साथ ही पीछे छोड़ गए कई अनसुलझे सवाल।
रोहित शर्मा, जिन्होंने सिर्फ 17 साल की उम्र में अपने सपनों की शुरुआत की थी, जयपुर के मानसरोवर में पहला टी कैफे खोलकर युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए थे। उनकी सोच अलग थी, उनका अंदाज अलग था—और यही वजह रही कि कुछ ही वर्षों में ‘चायवालाज’ ने जयपुर सहित 7 शहरों में अपनी पहचान बना ली।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती…
करीब छह महीने पहले रोहित ने एक ऐसा फैसला लिया, जिसने सभी को चौंका दिया—उन्होंने अपने सभी आउटलेट बंद कर दिए और पूरी तरह से अध्यात्म की राह पर चल पड़े।
रोहित का झुकाव आध्यात्म की ओर तेजी से बढ़ रहा था। वे संत-महात्माओं के संपर्क में रहने लगे थे। वृंदावन में उन्होंने प्रेमानंद महाराज से आशीर्वाद लिया और अपनी पुस्तक ‘तत्सुखे सुखित्वं’ उन्हें भेंट की। इस खास पल को उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर भी साझा किया था, जहां उन्होंने लिखा था कि यह आशीर्वाद उनकी पुस्तक को और अधिक प्रेममयी बना देगा।
इतना ही नहीं, उन्होंने प्रेमानंद महाराज के उपदेशों के वीडियो भी शेयर किए, जिनमें जीवनशैली और आहार को लेकर संदेश दिए गए थे। रोहित आईआईटी बाबा और सद्गुरु रितेश्वर महाराज जैसे संतों के संपर्क में भी रहे।
एक सफल उद्यमी, एक प्रेरणादायक युवा और फिर अचानक एक आध्यात्मिक जीवन की ओर मोड़—रोहित शर्मा की जिंदगी कई रंगों से भरी हुई थी। उन्हें ग्लोबल इंडिया बिजनेस फोरम द्वारा एक्सीलेंस अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका था।
लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर ऐसा क्या हुआ कि जीवन को नई दिशा देने वाले इस युवा ने इतना बड़ा कदम उठा लिया?
पुलिस के मुताबिक, मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। मामले की जांच जारी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रोहित अपने पीछे माता-पिता, पत्नी और 7 साल के बेटे को छोड़ गए हैं।
एक चमकता हुआ सपना, एक आध्यात्मिक खोज… और फिर अचानक एक दर्दनाक अंत—रोहित शर्मा की यह कहानी अब हर किसी के दिल में एक सवाल बनकर रह गई है।
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