जयपुर के वैज्ञानिक की बड़ी शोध उपलब्धि, कोविड की इम्यून मेमोरी से कैंसर उपचार की नई तकनीक विकसित
जयपुर के मूल निवासी और भारतीय जीवविज्ञानी डॉ. तेज कुमार पारीक तथा उनकी शोध टीम ने कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल की है। टीम ने कोविड-19 संक्रमण या टीकाकरण के बाद शरीर में बनने वाली इम्यून मेमोरी का उपयोग कर कैंसर से लड़ने की एक नई तकनीक विकसित की है। यह शोध Nature Communications जर्नल में प्रकाशित हुआ है। हालांकि, फिलहाल इस तकनीक का परीक्षण पशुओं पर हुआ है और इंसानों पर क्लिनिकल ट्रायल अभी होना बाकी है।
कोविड की प्रतिरक्षा क्षमता को बनाया कैंसर के खिलाफ हथियार
शोधकर्ताओं ने ‘प्रोटेक्सी’ (ProTeXi) नाम का डेंड्रिटिक सेल आधारित कैंसर वैक्सीन प्लेटफॉर्म विकसित किया है। इस तकनीक का उद्देश्य कोविड-19 के स्पाइक प्रोटीन के प्रति पहले से मौजूद शरीर की प्रतिरक्षा स्मृति (इम्यून मेमोरी) को सक्रिय कर कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया तैयार करना है। डॉ. तेज कुमार पारीक अमेरिका की केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी, क्लीवलैंड में प्रोफेसर हैं और इसी शोध दल का हिस्सा हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में कैंसर इम्यूनोथेरेपी के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल सकती है।
कैसे काम करती है यह नई तकनीक?
इस प्रक्रिया में सबसे पहले रोगी की श्वेत रक्त कोशिकाओं को अफेरेसिस तकनीक के माध्यम से निकाला जाता है। प्रयोगशाला में इन्हें डेंड्रिटिक कोशिकाओं में परिवर्तित कर इनमें कैंसर एंटीजन और SARS-CoV-2 (कोविड-19) स्पाइक प्रोटीन के विशेष अंश जोड़े जाते हैं। इसके बाद इन्हें मरीज के शरीर में वापस पहुंचाया जाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह प्रक्रिया कोविड से बनी CD4 टी-सेल इम्यून मेमोरी को सक्रिय करती है, जिससे CD8 टी-सेल कैंसर कोशिकाओं की पहचान कर उन पर अधिक प्रभावी ढंग से हमला कर पाती हैं। वर्तमान में यह तकनीक प्रयोगात्मक चरण में है।
व्यक्तिगत अनुभव से मिली शोध की प्रेरणा
जयपुर में जन्मे और पले-बढ़े डॉ. तेज कुमार पारीक ने राजस्थान विश्वविद्यालय, भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) बेंगलुरु और अमेरिका के राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (NIH) सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों में अध्ययन और शोध किया है। उन्होंने बताया कि कैंसर के खिलाफ यह शोध उनके लिए केवल वैज्ञानिक परियोजना नहीं, बल्कि व्यक्तिगत मिशन भी है। उन्होंने अपने परिवार में कैंसर के कारण अपनी भाभी को खोया है, जबकि उनकी मां भी इस बीमारी से जूझ रही हैं। यही अनुभव उन्हें इस क्षेत्र में नई संभावनाओं पर काम करने की प्रेरणा देता रहा।
मानव परीक्षण बाकी, लेकिन शोध ने जगाई नई उम्मीद
शोध टीम के अनुसार, मौजूदा कैंसर वैक्सीन की एक प्रमुख चुनौती पर्याप्त CD4 टी-सेल प्रतिक्रिया उत्पन्न न कर पाना है। नई तकनीक इसी कमी को दूर करने का प्रयास करती है। अब तक इस प्लेटफॉर्म का परीक्षण चूहों पर किया गया है, जहां सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी नई चिकित्सा तकनीक की प्रभावशीलता और सुरक्षा का वास्तविक आकलन मानव क्लिनिकल ट्रायल के बाद ही संभव होगा। यदि आगामी परीक्षण सफल रहते हैं, तो भविष्य में यह तकनीक कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकती है।
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