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अमायरा सुसाइड केस में नया मोड़, स्कूल संचालक-प्रिंसिपल समेत सभी आरोपियों को जमानत

जयपुर की चर्चित अमायरा सुसाइड केस में अदालत ने महत्वपूर्ण आदेश सुनाते हुए नीरजा मोदी स्कूल के संचालक, प्रिंसिपल, शिक्षिका और एक कर्मचारी को जमानत दे दी है। अदालत ने मामले का संज्ञान लेने के बाद इसे आगे की सुनवाई और ट्रायल के लिए बाल न्यायालय (जिला एवं सत्र न्यायाधीश) को भेज दिया। दूसरी ओर, पीड़ित परिवार ने अदालत के फैसले पर असंतोष जताते हुए कानूनी लड़ाई जारी रखने का ऐलान किया है।

अदालत ने जमानत देते हुए ट्रायल के लिए भेजा मामला

जयपुर महानगर प्रथम की एसीजेएम-10 अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान स्कूल संचालक सौरभ मोदी, प्रिंसिपल इंदु दुबे, शिक्षिका पुनीता शर्मा और कर्मचारी रामू पेश हुए। अदालत ने सभी आरोपियों को जमानत प्रदान करते हुए प्रकरण का संज्ञान लिया और आगे की सुनवाई के लिए केस को सक्षम बाल न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया। अब मामले में साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर नियमित न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

पीड़ित परिवार ने फैसले पर जताई नाराजगी

अमायरा के पिता विजय मीणा ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि अदालत अधिक गंभीर धाराओं पर भी संज्ञान लेगी। उनका कहना है कि परिवार इस निर्णय के खिलाफ उच्च अदालतों का दरवाजा खटखटाएगा और न्याय मिलने तक कानूनी लड़ाई जारी रखेगा। वहीं संयुक्त अभिभावक संघ ने भी पीड़ित परिवार का समर्थन दोहराते हुए निष्पक्ष सुनवाई और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है।

मामले में किन धाराओं के तहत हुई कार्रवाई

चार्जशीट के अनुसार, आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106 के तहत लापरवाही से मृत्यु से जुड़े आरोप तथा धारा 238 के तहत साक्ष्यों से छेड़छाड़ के आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा जुवेनाइल जस्टिस (JJ) एक्ट की धारा 75 के तहत बच्चों के प्रति कथित क्रूरता और मानसिक प्रताड़ना से जुड़े आरोप शिक्षिका के खिलाफ शामिल किए गए हैं। इन आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण ट्रायल के दौरान अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर होगा।

घटना के बाद कई अहम घटनाक्रम बने चर्चा का विषय

यह मामला नवंबर 2025 में छात्रा अमायरा की स्कूल परिसर में हुई मृत्यु के बाद चर्चा में आया था। जांच के दौरान स्कूल प्रशासन की कार्यप्रणाली, शिक्षकों की भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठे। बाद में पुलिस ने विस्तृत जांच पूरी कर अदालत में आरोपपत्र पेश किया। अब मामला बाल न्यायालय में चलेगा, जहां अभियोजन और बचाव पक्ष अपने-अपने साक्ष्य पेश करेंगे। अदालत के अंतिम निर्णय तक सभी आरोप न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं और किसी भी आरोपी को दोषी नहीं माना जा सकता।

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Stv News Rajasthan

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