PoJK पर फारूक अब्दुल्ला का केंद्र पर हमला, बोले- ‘अगर हमारा हिस्सा है तो चुप्पी क्यों?’
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में जारी अशांति और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों के बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं। उन्होंने कहा कि यदि भारत लगातार PoJK को अपना अभिन्न अंग बताता है, तो वहां के लोगों की स्थिति और कथित अत्याचारों पर केंद्र को खुलकर अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इस मुद्दे को प्रभावी ढंग से उठाने की मांग की।
‘PoJK हमारा है तो वहां के लोगों की आवाज क्यों नहीं उठाई जा रही?
फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि केंद्र सरकार लंबे समय से पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बताती रही है। ऐसे में यदि वहां के नागरिक कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं, तो भारत को इस मुद्दे पर स्पष्ट और मुखर रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार इस विषय पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक सक्रिय क्यों नहीं दिखाई दे रही। उनके मुताबिक, यदि किसी क्षेत्र पर भारत अपना दावा करता है तो वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर भी चिंता व्यक्त करना स्वाभाविक होना चाहिए।
प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहल की मांग
नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से आग्रह किया कि वे PoJK से जुड़े मुद्दों को वैश्विक मंचों पर मजबूती से उठाएं। उन्होंने कहा कि भारत को केवल अपने दावे दोहराने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वहां की परिस्थितियों पर भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करना चाहिए। उनका मानना है कि कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय पहल से इस विषय पर वैश्विक चर्चा को नई दिशा मिल सकती है।
मानवाधिकारों के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से हस्तक्षेप की अपील
फारूक अब्दुल्ला ने कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर संयुक्त राष्ट्र की संबंधित संस्थाओं से भी हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में आम नागरिकों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं, तो स्वतंत्र रूप से स्थिति का आकलन किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि नियंत्रण रेखा के उस पार रहने वाले लोगों की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को तथ्यों के आधार पर स्थिति का अध्ययन करना चाहिए।
PoJK में हालात को लेकर लगातार सामने आ रही हैं रिपोर्टें
हाल के समय में पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के विभिन्न क्षेत्रों में महंगाई, बिजली दरों, खाद्य संकट और प्रशासनिक नीतियों को लेकर विरोध प्रदर्शन की खबरें सामने आती रही हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की भी जानकारी दी गई है। हालांकि, इन दावों के अलग-अलग पक्ष सामने आते रहे हैं और कई मामलों में स्वतंत्र पुष्टि सीमित रही है। इसी पृष्ठभूमि में यह मुद्दा राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है।
भारत का आधिकारिक रुख पहले से स्पष्ट
भारत सरकार का आधिकारिक रुख लगातार यह रहा है कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न एवं अविभाज्य हिस्सा हैं तथा पाकिस्तान के कब्जे वाला क्षेत्र भी उसी का भाग है। विदेश मंत्रालय समय-समय पर इस विषय पर अपना पक्ष दोहराता रहा है। इसी संदर्भ में फारूक अब्दुल्ला के ताजा बयान ने एक बार फिर PoJK को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।