E20 पेट्रोल विवाद पहुंचा कोर्ट: नितिन गडकरी की ₹11 करोड़ मानहानि याचिका पर 5 अगस्त को सुनवाई
E20 पेट्रोल नीति को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल कथित भ्रामक पोस्ट अब कानूनी विवाद का रूप ले चुकी हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर विवादित सामग्री हटाने और ₹11 करोड़ के हर्जाने की मांग की है। उनका आरोप है कि फर्जी और भ्रामक पोस्ट के जरिए उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया। मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त को निर्धारित की गई है।
भ्रामक सोशल मीडिया पोस्ट हटाने की मांग
याचिका में नितिन गडकरी ने कहा है कि सोशल मीडिया पर उनके नाम और तस्वीरों का इस्तेमाल कर ऐसी पोस्ट प्रसारित की गईं, जिनमें उन्हें E20 पेट्रोल नीति से सीधे जोड़ने की कोशिश की गई। उनके अनुसार ये दावे तथ्यात्मक रूप से गलत हैं और इससे उनकी सार्वजनिक छवि प्रभावित हुई है। इसी आधार पर उन्होंने अदालत से विवादित पोस्ट हटाने और जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही ₹11 करोड़ के मानहानि दावे के जरिए कथित नुकसान की भरपाई की भी मांग की गई है।
5 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि कुछ प्रतिवादी पक्षों को अभी तक याचिका की प्रति प्राप्त नहीं हुई है। इस पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने गडकरी की ओर से सभी संबंधित पक्षों को याचिका की प्रतियां उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त के लिए निर्धारित कर दी। अब उस दिन अदालत आगे की कार्यवाही और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करेगी।
E20 नीति से खुद को अलग बताया
याचिका में गडकरी ने स्पष्ट किया है कि E20 यानी पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण की नीति पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र से संबंधित है। उन्होंने कहा कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री होने के नाते इस नीति के निर्माण या क्रियान्वयन में उनकी कोई भूमिका नहीं है। उनके अनुसार सोशल मीडिया पर उन्हें इस नीति से जोड़कर गलत धारणा बनाई गई, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास हुआ।
AI और डीपफेक कंटेंट पर भी उठाए सवाल
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ लोगों ने AI और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर ऐसा कंटेंट तैयार किया, जिससे यह आभास कराया गया कि E20 नीति से गडकरी या उनके परिवार को निजी लाभ हुआ है। गडकरी ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए अदालत से गूगल, मेटा, एक्स सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को कथित आपत्तिजनक सामग्री हटाने के निर्देश देने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि वे नीतियों पर स्वस्थ बहस के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन झूठी जानकारी और मानहानिकारक सामग्री के प्रसार पर कानूनी कार्रवाई आवश्यक है।
इसे भी पढ़ें- ट्विशा शर्मा डेथ केस: पूर्व जज और बेटे की न्यायिक हिरासत 11 अगस्त तक बढ़ी, CBI जांच जारी