जयपुर में बिजली चोरी पर बड़ी कार्रवाई: 4 इलाके बने हॉटस्पॉट, 322 मामलों का खुलासा, ₹82.77 लाख का जुर्माना
जयपुर ग्रामीण क्षेत्र में बिजली चोरी के खिलाफ चलाए गए विशेष अभियान में डिस्कॉम ने बड़ी सफलता हासिल की है। बस्सी, चौमूं, जमवारामगढ़ और शाहपुरा में व्यापक जांच के दौरान सैकड़ों स्थानों पर अवैध बिजली उपयोग का खुलासा हुआ। कार्रवाई के बाद 82.77 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जबकि संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा शुरू कर दी गई है।
चार क्षेत्रों में चला विशेष अभियान, 19 टीमों ने की जांच
लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जयपुर डिस्कॉम प्रबंधन ने बिजली चोरी रोकने के लिए विशेष अभियान शुरू किया। डिस्कॉम की प्रबंध निदेशक आरती डोगरा के निर्देश पर उत्तर सर्किल के अधीक्षण अभियंता एम.एल. मीणा के नेतृत्व में 19 विशेष टीमें गठित की गईं। इन टीमों ने बस्सी, चौमूं, जमवारामगढ़ और शाहपुरा क्षेत्रों में व्यापक निरीक्षण कर संदिग्ध बिजली कनेक्शनों की जांच की। अभियान का उद्देश्य अवैध बिजली उपयोग पर रोक लगाना और राजस्व हानि को कम करना था।
जांच में सामने आए बड़ी संख्या में अवैध कनेक्शन
अभियान के दौरान बड़ी संख्या में बिजली चोरी के मामले सामने आए। अधिकारियों के अनुसार हजारों स्थानों पर लोग सीधे बिजली के पोल से तार जोड़कर अवैध रूप से बिजली का उपयोग कर रहे थे। कई स्थानों पर रात के समय अस्थायी तार डालकर चोरी की जा रही थी ताकि दिन में कार्रवाई से बचा जा सके। टीमों ने मौके पर ऐसे सभी अवैध कनेक्शन हटाए और संबंधित उपभोक्ताओं के खिलाफ विद्युत अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू की। कुल 322 प्रकरण दर्ज किए गए और 82.77 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
बिजली चोरी का बोझ ईमानदार उपभोक्ताओं पर पड़ता है
बिजली विभाग का मानना है कि लगातार हो रही बिजली चोरी से डिस्कॉम को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इस नुकसान की भरपाई के लिए बिजली कंपनियों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बढ़ता है, जिसका असर अंततः नियमित बिल भरने वाले उपभोक्ताओं पर पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिजली चोरी रोकना केवल राजस्व बचाने का नहीं, बल्कि सभी उपभोक्ताओं के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करने का भी महत्वपूर्ण कदम है। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे मामलों पर प्रभावी नियंत्रण की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है।
इंजीनियरों की भूमिका की होगी समीक्षा
विशेष अभियान के बाद संबंधित डिवीजनों में तैनात अधिकारियों और इंजीनियरों की कार्यप्रणाली भी जांच के दायरे में आ गई है। डिस्कॉम प्रबंधन यह पता लगाने में जुटा है कि जिन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर बिजली चोरी हो रही थी, वहां निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी थी। विभाग ने संकेत दिए हैं कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा मिलीभगत सामने आती है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इससे भविष्य में निगरानी व्यवस्था और अधिक सख्त किए जाने की संभावना है।
बिजली चोरी रोकने के लिए अभियान रहेगा जारी
डिस्कॉम ने स्पष्ट किया है कि बिजली चोरी के खिलाफ विशेष अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे केवल वैध बिजली कनेक्शन का ही उपयोग करें और किसी भी प्रकार की बिजली चोरी की जानकारी विभाग को दें। विभाग का कहना है कि नियमित निगरानी, तकनीकी निरीक्षण और सख्त कार्रवाई के जरिए बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाएगा, ताकि राजस्व की हानि रोकी जा सके और सभी उपभोक्ताओं को बेहतर विद्युत सेवाएं मिल सकें।
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