मसूदा के पूर्व विधायक ब्रह्मदेव कुमावत का निधन, 2008 में निर्दलीय जीत से रचा था राजनीतिक इतिहास
राजस्थान की राजनीति के लिए सोमवार का दिन दुखद रहा। अजमेर जिले की मसूदा विधानसभा सीट से पूर्व विधायक और वरिष्ठ कांग्रेस नेता ब्रह्मदेव कुमावत का हृदयाघात के कारण निधन हो गया। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से मसूदा क्षेत्र सहित पूरे अजमेर जिले में शोक की लहर है। सरल स्वभाव, जनसंपर्क और क्षेत्रीय विकास के प्रति उनकी सक्रियता ने उन्हें जनता के बीच एक लोकप्रिय जनप्रतिनिधि के रूप में पहचान दिलाई।
अस्पताल ले जाते समय हुआ निधन, क्षेत्र में शोक की लहर
जानकारी के अनुसार, ब्रह्मदेव कुमावत की अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें बांदनवाड़ा से नसीराबाद उपजिला चिकित्सालय ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए अजमेर के जेएलएन अस्पताल रेफर किया, लेकिन रास्ते में ही उनका निधन हो गया। उनके निधन की सूचना मिलते ही समर्थकों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में लोग उनके निवास पर पहुंचकर परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं।
2008 में निर्दलीय जीतकर बनाई अलग पहचान
ब्रह्मदेव कुमावत का राजनीतिक सफर संघर्ष और जनसमर्थन का उदाहरण माना जाता है। वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने मसूदा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। उन्होंने उल्लेखनीय जीत दर्ज करते हुए विधानसभा में प्रवेश किया और क्षेत्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। बाद में उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस सरकार का समर्थन किया, जिसके बाद उन्हें संसदीय सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई। यह उपलब्धि उनके राजनीतिक जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय मानी जाती है।
कांग्रेस में सक्रिय भूमिका निभाते रहे
निर्दलीय विधायक बनने के बाद भी ब्रह्मदेव कुमावत कांग्रेस की राजनीति से जुड़े रहे। वर्ष 2013 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें जीत नहीं मिल सकी। इसके बाद भी उन्होंने संगठन में सक्रिय रहकर पार्टी के कार्यक्रमों और जनसंपर्क अभियानों में भागीदारी निभाई। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने टिकट की दावेदारी की, लेकिन पार्टी के निर्णय का सम्मान करते हुए अपना नामांकन वापस ले लिया और संगठन के साथ काम करते रहे। उनकी राजनीतिक शैली में अनुशासन और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता स्पष्ट दिखाई देती थी।
व्यापार से राजनीति तक का प्रेरणादायक सफर
30 नवंबर 1959 को अजमेर जिले के बांदनवाड़ा गांव में जन्मे ब्रह्मदेव कुमावत ने हायर सेकेंडरी तक शिक्षा प्राप्त की और व्यवसाय से व्यापारी रहे। सामाजिक सरोकारों से जुड़ाव ने उन्हें राजनीति की ओर प्रेरित किया। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में क्षेत्र की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया और विकास कार्यों के लिए लगातार प्रयास किए। उनके परिवार में चार पुत्र हैं, जबकि उनकी पत्नी का पहले ही निधन हो चुका था। उनके निधन से राजस्थान की राजनीति ने एक अनुभवी और जनप्रिय नेता को खो दिया है, जिन्हें उनके सामाजिक योगदान और जनसेवा के लिए लंबे समय तक याद किया जाएगा।
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