विवाद: धर्मेंद्र प्रधान का शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा, बोले– ‘युवाओं का भविष्य व्यक्तिगत प्रतिष्ठा से बड़ा’
NEET-UG परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और लगातार बढ़ते राजनीतिक व सामाजिक दबाव के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से त्यागपत्र देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी संदेश में उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के लाखों मेधावी विद्यार्थियों के हित और शिक्षा व्यवस्था की गरिमा बनाए रखना ही उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार: ‘पहले ही दिन से परिस्थिति से मुंह नहीं मोड़ा’
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने त्यागपत्र में उल्लेख किया कि परीक्षा प्रक्रिया में सामने आई अनियमितताओं के बाद उन्होंने पहले ही दिन से पूरी जिम्मेदारी निभाई है। उन्होंने कहा कि उनका प्रमुख संकल्प था कि किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य परीक्षा माफियाओं के कारण खराब न हो। इसी प्रतिबद्धता के तहत मामले की त्वरित जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई, विवादित परीक्षा को निरस्त किया गया और 21 जून को पुनः निष्पक्ष परीक्षा आयोजित कराई गई।
10 दिनों से दुखी था मन: भ्रम और बाधा पैदा करने की कोशिशों पर आहत
निवर्तमान शिक्षा मंत्री ने जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों और हालिया घटनाक्रम पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि पिछले 10 दिनों की परिस्थितियां उनके लिए बेहद पीड़ादायक रही हैं। 16 जुलाई को घोषित नीट-यूजी परिणामों को संतोषजनक बताते हुए उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद गरीब और साधारण परिवारों के बच्चों ने सफलता पाई। हालांकि, जिम्मेदार पदों पर बैठे कुछ लोगों द्वारा छात्रों को गुमराह करने और व्यवस्था में बाधाएं खड़ी करने से उनका मन व्यथित हुआ।
राष्ट्रविरोधी ताकतों से बचाव और युवाओं के करियर पर जोर: बताया इस्तीफे का कारण
अपने इस्तीफे के मुख्य कारण का खुलासा करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि यह फैसला किसी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा के लिए नहीं, बल्कि देश की एकता और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए लिया गया है। उन्होंने चिंता जताई कि आंदोलन की स्थिति का फायदा कोई राष्ट्रविरोधी ताकत न उठा सके। वे नहीं चाहते कि देश के होनहार छात्र कानूनी पेचीदगियों में उलझकर अपना समय गंवाएं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अब पूरी निष्ठा से अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान दें।
चार दशकों का सफर: प्रधानमंत्री का जताया आभार, भविष्य में सेवा का संकल्प
पत्र के अंत में धर्मेंद्र प्रधान ने अपने चार दशक लंबे सार्वजनिक जीवन को याद करते हुए कहा कि वे हमेशा से समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा प्रणाली के समर्थक रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मिले निरंतर मार्गदर्शन और भरोसे के लिए गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने दोहराया कि पद पर न रहते हुए भी वे राष्ट्र निर्माण, भारतीय युवाओं के सशक्तीकरण और अपने गृह राज्य ओडिशा के सर्वांगीण विकास के लिए जीवन पर्यंत समर्पित रहेंगे।