NEET-UG विवाद: इस्तीफे के बाद भावुक हुए धर्मेंद्र प्रधान, बोले– युवाओं के सपनों से बढ़कर कुछ नहीं
NEET-UG परीक्षा विवाद के बीच पद से त्यागपत्र देने के बाद निवर्तमान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पहला आधिकारिक बयान सामने आया है। उन्होंने अपने जारी सार्वजनिक पत्र में स्वीकार किया कि परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं से उनका मन पिछले कई दिनों से अत्यंत दुखी था। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे देश के युवाओं की भावनाओं, आकांक्षाओं और न्यायोचित मांगों का गहरा सम्मान करते हैं। चार दशकों से शिक्षा सुधारों से जुड़े रहने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों के अधिकारों की रक्षा और एक पारदर्शी व्यवस्था का निर्माण ही उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रही है।
चार दशकों का समर्पण: युवाओं और शिक्षा सुधारों के प्रति अटूट निष्ठा
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने आधिकारिक बयान में सार्वजनिक जीवन में अपने लंबे सफर को याद किया। उन्होंने कहा कि वे पिछले चार दशकों से अधिक समय से छात्र राजनीति, शिक्षकों के हितों और राष्ट्र निर्माण के लिए शिक्षा सुधारों के प्रति समर्पित रहे हैं। उनका दृढ़ विश्वास है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा प्रणाली ही मजबूत राष्ट्र की नींव रखती है। उन्होंने दोहराया कि अभ्यर्थियों के सपने केवल उनका व्यक्तिगत लक्ष्य नहीं हैं, बल्कि वे विकसित भारत के वास्तविक निर्माता और भविष्य के शिल्पकार हैं। इसीलिए उनकी भावनाओं का सम्मान करना ही लोकतांत्रिक मूल्यों की सच्ची पहचान है।
NEET-UG अनियमितता पर त्वरित कार्रवाई: CBI जांच और ऑनलाइन परीक्षा का फैसला
परीक्षा में सामने आई गड़बड़ियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि 3 मई को हुई परीक्षा में हुई धांधली बेहद पीड़ादायक थी। सरकार ने इस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए मामले की व्यापक जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी और प्रभावित परीक्षा को निरस्त किया। अभ्यर्थियों के हित में पुन: परीक्षा आयोजित की गई और भविष्य में शुचिता सुनिश्चित करने के लिए अगले वर्ष से परीक्षा को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में कराने का फैसला लिया गया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान 20 लाख से अधिक विद्यार्थियों के भविष्य और पारदर्शी व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई।
संपूर्ण प्रशासनिक समन्वय: 21 जून को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई परीक्षा
पत्र में निवर्तमान मंत्री ने बताया कि संकट के समय सरकार ने ‘होल ऑफ गवर्नमेंट’ दृष्टिकोण अपनाकर कार्य किया। केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और विशेषकर जिला प्रशासनों के संयुक्त प्रयासों के बल पर 21 जून को पुनः परीक्षा सफलतापूर्वक और सुचारू रूप से आयोजित कराई जा सकी। उन्होंने इस कठिन दौर में सहयोग देने के लिए सभी विद्यार्थियों और अभिभावकों का आभार जताया। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने पहले दिन से ही नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की और किसी भी चुनौती से मुंह नहीं मोड़ा, ताकि परीक्षा माफिया किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य खराब न कर सके।
परिणाम पर संतोष, लेकिन गुमराह करने वाली राजनीति से मन व्यथित
16 जुलाई को घोषित नीट-यूजी परिणामों पर संतोष व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद साधारण व गरीब पृष्ठभूमि से आने वाले कई प्रतिभाशाली छात्रों ने सफलता हासिल की। हालांकि, उन्होंने इस बात पर गहरा दुख जताया कि संकट के समय भी कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों ने राजनीतिक लाभ के लिए परीक्षार्थियों को गुमराह करने और बाधाएं खड़ी करने का प्रयास किया। इसी तरह की गतिविधियों से उनका मन पिछले 10 दिनों से काफी व्यथित था, जिसके चलते उन्होंने प्रजातांत्रिक मूल्यों और युवाओं की आकांक्षाओं का सम्मान करते हुए यह कदम उठाया।