‘मुझे गिरफ्तार करो, मैं अस्पताल छोड़ रहा हूं’; सोनम वांगचुक के नए वीडियो से बढ़ी सियासी हलचल
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का एक नया वीडियो सामने आने के बाद एक बार फिर विवाद और सियासी बहस तेज हो गई है। वीडियो में वह सफदरजंग अस्पताल से बाहर निकलने की कोशिश करते हुए पुलिस और अस्पताल प्रशासन से तीखी बहस करते नजर आ रहे हैं। वांगचुक का आरोप है कि दिल्ली हाईकोर्ट की अनुमति के बावजूद उन्हें मेदांता अस्पताल जाने से रोका गया। इस दौरान उन्होंने पुलिस से कहा कि यदि उन्हें रोका जा रहा है तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाए।
अस्पताल परिसर में पुलिस और प्रशासन से हुई बहस
सामने आए वीडियो में सोनम वांगचुक सफदरजंग अस्पताल परिसर में पुलिसकर्मियों और अस्पताल प्रशासन से बहस करते दिखाई देते हैं। उनका कहना था कि वह अस्पताल छोड़कर गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल जाना चाहते हैं, लेकिन उन्हें रोका जा रहा है। वीडियो में वह पुलिस से कहते हैं, “अगर मुझे जाने नहीं दिया जा रहा है तो मुझे गिरफ्तार कर लो।” उनका आरोप था कि इस तरह उन्हें अनावश्यक रूप से रोका जा रहा है और यदि उनकी तबीयत बिगड़ती है तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
पत्नी ने भी जताई नाराजगी
वीडियो में सोनम वांगचुक की पत्नी भी पुलिस और अस्पताल प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जताती नजर आती हैं। उनका कहना था कि परिवार की स्थिति को समझने के बजाय अधिकारियों का व्यवहार सहयोगात्मक नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत के निर्देशों के बावजूद अस्पताल से बाहर निकलने की प्रक्रिया में अनावश्यक बाधाएं पैदा की गईं, जिससे पूरे घटनाक्रम को लेकर तनाव बढ़ गया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने मेदांता भेजने की दी थी अनुमति
इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने 21 जुलाई को सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति दी थी। अदालत ने बेहतर चिकित्सा सुविधा और स्वतंत्र चिकित्सकीय निगरानी को ध्यान में रखते हुए यह आदेश दिया था। इसके बाद आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने पर उन्हें शाम के समय अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और आगे के इलाज के लिए मेदांता ले जाया गया।
26 दिन बाद खत्म हुई भूख हड़ताल
सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक चली अपनी भूख हड़ताल 23 जुलाई की देर रात समाप्त कर दी। उन्होंने केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में जूस पीकर अपना अनशन तोड़ा। इस दौरान उन्होंने सरकार के सामने अपनी प्रमुख मांगें रखीं, जिन पर केंद्र सरकार की ओर से विचार करने का आश्वासन दिया गया। हालांकि, आंदोलन और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर अब भी जारी है।