‘भार्गवास्त्र’ का सफल ट्रायल, 10 किमी दूर और 5,000 मीटर ऊंचाई तक ड्रोन खतरे से निपटने में सक्षम स्वदेशी सिस्टम
भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक को एक और बड़ी सफलता मिली है। महाराष्ट्र के नागपुर में सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने भारतीय सेना के समक्ष ‘भार्गवास्त्र’ (Bhargavastra) काउंटर-स्वार्म ड्रोन सिस्टम का सफल प्रदर्शन किया। यह प्रणाली हथियारबंद ड्रोन, ड्रोन स्वार्म और लोइटरिंग म्यूनिशन जैसे आधुनिक हवाई खतरों से निपटने के लिए विकसित की गई है।
ड्रोन स्वार्म से निपटने के लिए तैयार स्वदेशी प्रणाली
‘भार्गवास्त्र’ एक मल्टी-लेयर्ड काउंटर-ड्रोन डिफेंस सिस्टम है, जिसे विशेष रूप से तेजी से बढ़ते ड्रोन खतरों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यह प्रणाली एक साथ कई ड्रोन या ड्रोन के झुंड (Swarm) का मुकाबला करने में सक्षम है। आधुनिक युद्ध में ड्रोन स्वार्म को बड़ी चुनौती माना जाता है और यह सिस्टम ऐसे हमलों के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
10 किलोमीटर की रेंज और 5,000 मीटर तक कार्रवाई की क्षमता
कंपनी के अनुसार, ‘भार्गवास्त्र’ लगभग 10 किलोमीटर की दूरी तक ड्रोन खतरों को निशाना बना सकता है। इसके अलावा यह करीब 5,000 मीटर की ऊंचाई तक उड़ रहे ड्रोन और अन्य कम ऊंचाई वाले हवाई लक्ष्यों के खिलाफ कार्रवाई करने में सक्षम है। इसकी यह क्षमता सीमावर्ती क्षेत्रों और संवेदनशील सैन्य ठिकानों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
स्वदेशी रॉकेट और माइक्रो-मिसाइल तकनीक का इस्तेमाल
इस रक्षा प्रणाली में पूरी तरह भारत में विकसित अनगाइडेड रॉकेट और सटीक निशाना लगाने वाली माइक्रो-मिसाइलों का उपयोग किया गया है। इन्हें मल्टी-लेयर्ड एंगेजमेंट आर्किटेक्चर के तहत एकीकृत किया गया है, जिससे अलग-अलग दूरी और ऊंचाई पर मौजूद लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से निशाना बनाया जा सकता है। कंपनी का दावा है कि यह प्रणाली कम लागत में प्रभावी ‘हार्ड-किल’ क्षमता प्रदान करती है।
आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित
हाल के वर्षों में युद्ध और सुरक्षा अभियानों में ड्रोन तथा लोइटरिंग म्यूनिशन का उपयोग तेजी से बढ़ा है। ऐसे में काउंटर-ड्रोन सिस्टम की आवश्यकता भी बढ़ी है। ‘भार्गवास्त्र’ को इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है, ताकि सैन्य प्रतिष्ठानों, महत्वपूर्ण ढांचों और सीमावर्ती क्षेत्रों को ड्रोन हमलों से सुरक्षित रखा जा सके।
आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी मजबूती
‘भार्गवास्त्र’ का सफल प्रदर्शन भारत के रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। यदि यह प्रणाली भविष्य में बड़े पैमाने पर शामिल की जाती है, तो इससे विदेशी काउंटर-ड्रोन प्रणालियों पर निर्भरता कम होगी और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी नई मजबूती मिलेगी।