CJP प्रदर्शन पर संजय मांजरेकर का बयान, युवाओं के समर्थन में की पोस्ट, कई पूर्व क्रिकेटरों ने भी रखी राय
दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के प्रदर्शन के बीच पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने सोशल मीडिया पर युवाओं के समर्थन में अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मामला केवल कथित पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं की भावनाओं और उनकी आवाज से भी जुड़ा है। इस बीच सचिन तेंदुलकर, इरफान पठान और शिखर धवन ने भी छात्रों और परीक्षा प्रणाली को लेकर अपने विचार साझा किए हैं।
संजय मांजरेकर ने युवाओं के समर्थन में लिखी दो पोस्ट
पूर्व भारतीय बल्लेबाज संजय मांजरेकर ने सोशल मीडिया मंच X पर लगातार दो पोस्ट साझा किए। पहली पोस्ट में उन्होंने लिखा कि वह देश के युवाओं के साथ खड़े हैं और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। दूसरी पोस्ट में उन्होंने अपनी व्यक्तिगत राय रखते हुए कहा कि यह मुद्दा केवल NEET पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं की भावनाओं और व्यवस्था को लेकर उनके असंतोष से भी जुड़ा है। यह टिप्पणी उनके व्यक्तिगत विचार हैं।
पेपर लीक और व्यवस्था पर जताई चिंता
मांजरेकर ने अपने बयान में कहा कि छात्रों के विरोध को केवल एक परीक्षा विवाद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने लिखा कि दो बच्चों के पिता होने के नाते वह युवाओं की चिंताओं को समझते हैं और उनका मानना है कि संवाद और सकारात्मक समाधान जरूरी है। उन्होंने सरकार और संबंधित संस्थाओं से इस मुद्दे पर सार्थक कदम उठाने की अपेक्षा भी जताई। हालांकि, उन्होंने किसी विशेष मामले पर कोई प्रत्यक्ष आरोप नहीं लगाया।
सचिन, इरफान और शिखर धवन ने भी रखी अपनी बात
पूर्व क्रिकेटर इरफान पठान ने कहा कि हर छात्र और उसका परिवार सफलता के लिए वर्षों तक मेहनत करता है, इसलिए किसी भी परीक्षा में अनियमितता उनकी उम्मीदों को नुकसान पहुंचाती है। वहीं सचिन तेंदुलकर ने ईमानदारी और मेहनत के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि समाज को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जहां परिश्रम का सम्मान हो और छात्रों को निष्पक्ष अवसर मिलें। दूसरी ओर शिखर धवन ने युवाओं से धैर्य बनाए रखने और संस्थाओं पर भरोसा रखने की अपील की।
सोशल मीडिया पर जारी है बहस
छात्र प्रदर्शन और परीक्षा प्रणाली को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। विभिन्न क्षेत्रों की कई हस्तियां अपने-अपने विचार साझा कर रही हैं। जहां कुछ लोग छात्रों की चिंताओं के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं, वहीं कई लोग निष्पक्ष जांच और संस्थागत सुधार की आवश्यकता पर बल दे रहे हैं। इस बीच संबंधित मुद्दों पर सरकारी और कानूनी स्तर पर भी विभिन्न प्रक्रियाएं जारी हैं।
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