CJP Protest 2026: NEET विवाद से उठा आंदोलन, जंतर-मंतर से संसद तक बढ़ा सियासी और सामाजिक दबाव
NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब राष्ट्रीय स्तर की बहस का विषय बन चुका है। जंतर-मंतर से संसद मार्ग तक पहुंचे आंदोलन ने शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और युवाओं के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। पुलिस कार्रवाई, राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं और लगातार जारी प्रदर्शनों के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार और प्रदर्शनकारी संगठनों के बीच समाधान का रास्ता कैसे निकलेगा।
NEET विवाद से शुरू हुआ आंदोलन, जंतर-मंतर बना केंद्र
प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर छात्रों का असंतोष धीरे-धीरे बड़े आंदोलन में बदल गया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों छात्र और विभिन्न सामाजिक संगठन शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर एकत्र हुए। प्रदर्शन के दौरान शिक्षा मंत्री के इस्तीफे सहित कई मांगें उठाई गईं। बाद में यह विरोध संसद मार्च तक पहुंचा, जहां प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनावपूर्ण स्थिति भी देखने को मिली।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ कैसे बनी आंदोलन का चेहरा?
इस आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया पर उभरे ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)’ नाम ने तेजी से पहचान बनाई। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकार की आलोचना करने वालों के लिए इस्तेमाल किए गए एक विवादित शब्द को उन्होंने विरोध के प्रतीक के रूप में अपनाया। सोशल मीडिया अभियान, मीम्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए यह समूह युवाओं तक तेजी से पहुंचा और देखते ही देखते आंदोलन का प्रमुख चेहरा बन गया। CJP का कहना है कि उसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों के अधिकारों की आवाज उठाना है।
पुलिस कार्रवाई और जांच पर अलग-अलग दावे
संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने कई एफआईआर दर्ज कीं। पुलिस का आरोप है कि कुछ लोगों ने बैरिकेड तोड़े, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और सुरक्षाकर्मियों पर हमला किया। वहीं प्रदर्शनकारियों और विपक्षी दलों का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया गया। इन आरोपों और घटनाओं की जांच जारी है तथा विभिन्न वीडियो और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है।
सोनम वांगचुक समेत कई हस्तियों का मिला समर्थन
आंदोलन को उस समय और अधिक चर्चा मिली जब पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक सहित कई सार्वजनिक हस्तियों ने छात्रों की मांगों का समर्थन किया। इसके अलावा विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं ने भी प्रदर्शनकारियों के पक्ष में बयान दिए और शिक्षा व्यवस्था पर संसद में चर्चा की मांग की। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि परीक्षा संबंधी मामलों में जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
युवाओं की नाराजगी ने बढ़ाई सरकार की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंदोलन केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता जैसे व्यापक मुद्दों से जुड़ गया है। बड़ी संख्या में युवा परीक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर सरकार पर आंदोलन से जुड़े मुद्दों का समाधान निकालने और छात्रों का भरोसा बहाल करने का दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हैं। सरकार, छात्र संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी लगातार जारी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या बातचीत के जरिए कोई समाधान निकलता है या आंदोलन आगे और व्यापक रूप लेता है। फिलहाल शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली से जुड़े सवाल राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं।