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समलेटी बस बमकांड में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, फांसी की सजा रद्द; मुख्य आरोपी का होगा दोबारा ट्रायल

राजस्थान के बहुचर्चित 1996 समलेटी बस बम विस्फोट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी डॉ. अब्दुल हमीद की फांसी की सजा और दोषसिद्धि रद्द कर दी है। अदालत ने निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का हवाला देते हुए नए सिरे से ट्रायल कराने का निर्देश दिया है। वहीं, उम्रकैद की सजा काट रहे सह-आरोपी पप्पू उर्फ सलीम को बरी कर दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों रद्द की फांसी की सजा?

करीब तीन दशक पुराने समलेटी बस बम विस्फोट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुख्य आरोपी डॉ. अब्दुल हमीद को मूल ट्रायल के दौरान प्रभावी कानूनी सहायता नहीं मिल सकी, जिससे निष्पक्ष सुनवाई का संवैधानिक अधिकार प्रभावित हुआ। इसी आधार पर अदालत ने राजस्थान हाईकोर्ट के 2019 के फैसले को निरस्त करते हुए फांसी की सजा और दोषसिद्धि दोनों रद्द कर दीं। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संजय करोल और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने निर्देश दिया कि मामले की सुनवाई अब नए सिरे से की जाएगी, ताकि सभी पक्षों को निष्पक्ष अवसर मिल सके।

फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगा नया ट्रायल

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को इस मामले के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट नामित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि नए ट्रायल के दौरान सभी साक्ष्यों का स्वतंत्र रूप से परीक्षण किया जाएगा और पहले दिए गए किसी भी न्यायिक निष्कर्ष से प्रभावित हुए बिना फैसला सुनाया जाएगा। साथ ही, अदालत ने प्रयास करने को कहा है कि मुकदमे की सुनवाई एक वर्ष के भीतर पूरी हो। सुनवाई ऐसे न्यायिक अधिकारी के समक्ष होगी, जिन्हें गंभीर आपराधिक मामलों की पर्याप्त न्यायिक समझ और अनुभव हो।

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सह-आरोपी पप्पू उर्फ सलीम को मिली राहत

शीर्ष अदालत ने इस मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे सह-आरोपी पप्पू उर्फ सलीम को सभी आरोपों से बरी कर दिया। इसके साथ ही राजस्थान सरकार द्वारा उसकी स्थायी पैरोल को चुनौती देने वाली याचिका भी खारिज कर दी गई। अदालत ने अन्य आरोपियों जावेद खान और अब्दुल गनी समेत जिन लोगों को पहले बरी किया जा चुका था, उनके खिलाफ राज्य सरकार की अपीलें भी स्वीकार नहीं कीं। इस फैसले के बाद मामले में कई आरोपियों को कानूनी राहत मिल गई है।

1996 का समलेटी बस बम विस्फोट क्यों बना था चर्चित?

22 मई 1996 को दौसा जिले के महवा थाना क्षेत्र में आगरा से बीकानेर जा रही राजस्थान रोडवेज की बस में शक्तिशाली बम विस्फोट हुआ था। इस धमाके में 14 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 37 यात्री घायल हो गए थे। यह घटना दिल्ली के लाजपत नगर बम विस्फोट के एक दिन बाद हुई थी, जिससे देशभर में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर आ गई थीं। जांच के दौरान स्थानीय पुलिस और सीबी-सीआईडी ने कई राज्यों से आरोपियों को गिरफ्तार किया और कुछ आरोपियों के जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) से कथित संबंध होने का दावा किया था।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब बदली कानूनी स्थिति

वर्ष 2014 में बांदीकुई की विशेष अदालत ने डॉ. अब्दुल हमीद को फांसी और सात अन्य आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद 2019 में राजस्थान हाईकोर्ट ने छह आरोपियों को बरी करते हुए डॉ. हमीद की फांसी और पप्पू उर्फ सलीम की उम्रकैद बरकरार रखी थी। अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद डॉ. हमीद के खिलाफ पूरा मुकदमा दोबारा चलेगा, जबकि पप्पू उर्फ सलीम को पूरी तरह राहत मिल गई है। इस फैसले ने लगभग 30 साल पुराने इस बहुचर्चित मामले को एक बार फिर कानूनी चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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