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पीवणा के डर में विषहीन रेड सैंड बोआ बन रहा शिकार, विशेषज्ञों ने दी जागरूकता की सलाह

बाड़मेर और जैसलमेर क्षेत्र में पीवणा (कॉमन करैत) के डसने से दंपती की मौत के बाद लोगों में सांपों को लेकर डर बढ़ गया है। इसी भय के कारण ग्रामीण विषहीन रेड सैंड बोआ को भी पीवणा समझकर मार रहे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि गलत पहचान से दुर्लभ प्रजातियों का अस्तित्व खतरे में पड़ रहा है। उन्होंने लोगों से सांप दिखने पर उसे नुकसान पहुंचाने के बजाय वन विभाग या स्नेक रेस्क्यू टीम को सूचना देने की अपील की है।

पीवणा की घटना के बाद बढ़ा सांपों का डर

करीब एक माह पहले बाड़मेर जिले के फागलिया गांव में पीवणा (कॉमन करैत) के डसने से पति-पत्नी की मौत के बाद पूरे इलाके में सांपों को लेकर दहशत का माहौल है। इस घटना के बाद ग्रामीण रेत में दिखाई देने वाले कई सांपों को बिना पहचान किए ही मार रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार भय और जानकारी के अभाव में लोग हर छोटे-मोटे सांप को पीवणा मान लेते हैं। इसका सबसे ज्यादा नुकसान रेड सैंड बोआ जैसी विषहीन और दुर्लभ प्रजाति को हो रहा है, जो इंसानों के लिए खतरनाक नहीं मानी जाती।

पीवणा और रेड सैंड बोआ में बड़ा अंतर

विशेषज्ञों के अनुसार पीवणा, जिसे कॉमन करैत कहा जाता है, देश के सबसे विषैले सांपों में शामिल है। इसका रंग काला या गहरा नीला होता है और शरीर पर सफेद धारियां दिखाई देती हैं। यह अधिकतर रात में सक्रिय रहता है और इसका विष तंत्रिका तंत्र पर गंभीर असर डाल सकता है। वहीं रेड सैंड बोआ पूरी तरह विषहीन और शांत स्वभाव का सांप है। स्थानीय भाषा में इसे ‘बोगी का बच्चा’ या ‘दोमुंहा’ भी कहा जाता है। इसका शरीर लाल-भूरे रंग का मोटा और बेलनाकार होता है तथा यह सामान्यतः रेत के भीतर रहता है।

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रेड सैंड बोआ पर्यावरण के लिए है महत्वपूर्ण

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि रेड सैंड बोआ खेतों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद उपयोगी प्रजाति है। यह चूहों, छिपकलियों और अन्य छोटे जीवों को खाकर उनकी संख्या नियंत्रित करता है, जिससे किसानों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलता है। यह सांप बिना उकसावे किसी पर हमला नहीं करता। गलत पहचान के कारण इसकी लगातार हो रही मौतें जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण के लिए चिंता का विषय बनती जा रही हैं।

विशेषज्ञों ने की सही पहचान और जागरूकता की अपील

स्नेक कैचरों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी सांप को देखकर घबराएं नहीं और न ही उसे नुकसान पहुंचाएं। यदि किसी इलाके में सांप दिखाई दे तो सुरक्षित दूरी बनाकर तुरंत वन विभाग या प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यू टीम को सूचना दें। उनका कहना है कि सही पहचान और जागरूकता से न केवल लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि रेड सैंड बोआ जैसी दुर्लभ और संरक्षित प्रजातियों का संरक्षण भी संभव हो सकेगा।

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