भैंस चोरी केस में 10 हजार की रिश्वत लेते हेड कांस्टेबल गिरफ्तार, एसीबी ने थाने में मारा छापा
राजस्थान के ब्यावर जिले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सदर थाने के एक हेड कांस्टेबल और उसके कथित दलाल को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोप है कि भैंस चोरी के मामले में समझौता कराने के नाम पर परिवादी से 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। ट्रैप कार्रवाई के दौरान रिश्वत की रकम एक अन्य व्यक्ति को सौंप दी गई, जो मौके से फरार हो गया। एसीबी अब पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है।
भैंस चोरी मामले में मांगी गई थी रिश्वत
एसीबी के अनुसार ब्यावर सदर थाने के हेड कांस्टेबल रामाकिशन और एक कांस्टेबल के खिलाफ शिकायत मिली थी कि वे भैंस चोरी के मामले में समझौता कराने के एवज में परिवादी पक्ष से रिश्वत की मांग कर रहे हैं। शिकायत में आरोप था कि राजीनामा राशि से अलग 10 हजार रुपये अतिरिक्त मांगे जा रहे थे। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने प्राथमिक जांच कर आरोपों का सत्यापन किया और शिकायत सही पाए जाने पर ट्रैप की योजना तैयार की।
योजना बनाकर एसीबी ने बिछाया जाल
जांच के बाद एसीबी ने शिकायतकर्ता के सहयोग से ट्रैप ऑपरेशन चलाया। तय योजना के अनुसार रिश्वत की रकम आरोपियों तक पहुंचाई जानी थी। कार्रवाई के दौरान कथित दलाल कानाराम ने हेड कांस्टेबल के लिए शिकायतकर्ता से 8 हजार रुपये लिए। जैसे ही लेनदेन हुआ, पहले से निगरानी कर रही एसीबी टीम मौके पर पहुंच गई। टीम को देखते ही रिश्वत की रकम एक अन्य व्यक्ति को सौंप दी गई, जिसने मौके से भागने की कोशिश की।
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रिश्वत की रकम लेकर फरार हुआ तीसरा आरोपी
एसीबी अधिकारियों के मुताबिक कार्रवाई के दौरान राहुल काठात नामक व्यक्ति रिश्वत की रकम लेकर फरार हो गया। पूछताछ में दलाल कानाराम ने स्वीकार किया कि उसने यह राशि हेड कांस्टेबल रामाकिशन के लिए ली थी। इसके बाद एसीबी ने हेड कांस्टेबल और दलाल दोनों को गिरफ्तार कर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया। फरार आरोपी की तलाश के लिए अलग टीम गठित की गई है।
एसीबी ने शुरू की विस्तृत जांच
एसीबी अब इस पूरे मामले में रिश्वत मांगने की साजिश, अन्य संभावित कर्मचारियों की भूमिका और फरार आरोपी की तलाश में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस तरह के मामलों में पहले भी इसी तरीके से अवैध वसूली की जाती रही है।