सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान ने कनाडा से मांगा समर्थन, संयुक्त बयान में नहीं मिला जिक्र
सिंधु जल संधि (IWT) को लेकर पाकिस्तान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश की है। उप-प्रधानमंत्री इशाक डार ने कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ बैठक के दौरान भारत पर संधि को निलंबित कर पानी को “हथियार” की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। हालांकि, बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में न तो सिंधु जल संधि और न ही कश्मीर का उल्लेख किया गया, जिसे पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक झटका माना जा रहा है।
कनाडा के सामने उठाया सिंधु जल संधि का मुद्दा
इस्लामाबाद में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री इशाक डार ने भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इस फैसले से क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियां और बढ़ी हैं। डार ने कनाडा सहित मित्र देशों से अपील की कि वे भारत से संधि बहाल करने और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करने का आग्रह करें।
संयुक्त बयान में नहीं मिला कोई उल्लेख
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान की ओर से कश्मीर और सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाया गया, लेकिन कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने इन विषयों पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की। बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में भी दोनों मुद्दों का उल्लेख नहीं किया गया। इसे पाकिस्तान के लिए अपेक्षित कूटनीतिक समर्थन नहीं मिलने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
क्या है सिंधु जल संधि?
1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते के तहत सिंधु बेसिन की छह नदियों के जल बंटवारे का प्रावधान किया गया। पूर्वी नदियों का उपयोग भारत को और पश्चिमी नदियों का अधिकांश जल पाकिस्तान को आवंटित किया गया। यह संधि दोनों देशों के बीच सबसे लंबे समय तक लागू रहने वाले समझौतों में से एक रही है।
भारत का क्या है रुख?
भारत का कहना है कि सीमा पार आतंकवाद को समर्थन मिलने के कारण सिंधु जल संधि को निलंबित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी कह चुके हैं कि “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।” भारत का आधिकारिक रुख है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ विश्वसनीय और ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि को बहाल करने पर विचार नहीं किया जाएगा।
पहले भी उठा चुका है पाकिस्तान यह मुद्दा
पाकिस्तान के कई वरिष्ठ नेताओं ने पहले भी सिंधु जल संधि को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की आलोचना की है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने भी आरोप लगाया था कि भारत पानी का इस्तेमाल दबाव बनाने के साधन के रूप में कर रहा है। वहीं भारत इन आरोपों को खारिज करते हुए अपने फैसले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा कदम बताता रहा है।