NEET विवाद पर महुआ मोइत्रा का तंज, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग फिर तेज
NEET परीक्षा विवाद को लेकर जारी राजनीतिक घमासान के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा तंज कसा है। सोशल मीडिया पर किए गए उनके बयान ने एक बार फिर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को चर्चा में ला दिया है। दूसरी ओर, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और सरकार की ओर से अब तक इस्तीफे को लेकर कोई संकेत नहीं दिया गया है।
महुआ मोइत्रा का शिक्षा मंत्री पर तंज
तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधा। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि “शायद शिक्षा मंत्री को इस्तीफा लिखना नहीं आता।” उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब NEET परीक्षा विवाद को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है और जवाबदेही की मांग कर रहा है।
इस्तीफे की मांग पर विपक्ष आक्रामक
NEET विवाद के बाद विपक्षी दल लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों का आरोप है कि परीक्षा से जुड़े विवादों और अनियमितताओं के मामलों में सरकार को जवाब देना चाहिए। वहीं सरकार का कहना है कि मामले की जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
जंतर-मंतर पर जारी है प्रदर्शन
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्र और CJP समर्थक अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में शिक्षा व्यवस्था में सुधार, NEET विवाद पर कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग शामिल है। प्रदर्शन स्थल पर सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल की तैनाती भी बढ़ाई गई है।
सरकार ने दोहराया जांच का भरोसा
केंद्र सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि NEET परीक्षा से जुड़े मामलों की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का कहना है कि छात्रों के भविष्य से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि केवल जांच का आश्वासन पर्याप्त नहीं है और राजनीतिक जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
बयान से फिर गरमाई राजनीति
महुआ मोइत्रा के ताजा बयान के बाद NEET विवाद पर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। एक ओर विपक्ष सरकार को घेरने में जुटा है, तो दूसरी ओर सरकार जांच प्रक्रिया और कानूनी कार्रवाई का हवाला दे रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और राजनीतिक मंचों पर प्रमुख विषय बना रह सकता है।