राम मंदिर चंदा मामले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बोला- ‘अदालत राजनीति का मंच नहीं’; SIT जांच पर मांगा जवाब
अयोध्या राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि न्यायालय राजनीतिक बहस का मंच नहीं है। अदालत ने कहा कि उसका उद्देश्य केवल निष्पक्ष और प्रभावी जांच सुनिश्चित करना है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच को लेकर विस्तृत जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई तय की है।
‘राजनीति नहीं, निष्पक्ष जांच जरूरी’
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। पीठ ने स्पष्ट किया कि अदालत का काम किसी राजनीतिक विवाद का हिस्सा बनना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि यदि किसी अपराध के आरोप हैं तो उनकी निष्पक्ष और कानून के अनुसार जांच हो। अदालत ने सभी पक्षों से न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा बनाए रखने की भी अपील की।
SIT जांच की स्थिति पर मांगा सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से बताया गया कि प्रारंभिक जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित की गई थी। SIT ने मामले में संज्ञेय अपराध के संकेत मिलने के बाद जांच पुलिस को सौंप दी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि क्या दोबारा वरिष्ठ अधिकारियों वाली SIT को जांच का दायित्व सौंपा जा सकता है। अदालत ने इस संबंध में राज्य सरकार से विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है।
याचिकाकर्ताओं ने पारदर्शिता की उठाई मांग
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में कहा गया कि मंदिर निर्माण के लिए देशभर के श्रद्धालुओं ने चंदा दिया है, इसलिए पूरे वित्तीय रिकॉर्ड में पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने दान रसीदों, बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल लेनदेन और अन्य दस्तावेजों को सुरक्षित रखने तथा आवश्यक जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। अदालत ने इन सुझावों पर विचार करने का आश्वासन दिया, जबकि राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि जांच से जुड़े सभी आवश्यक रिकॉर्ड सुरक्षित रखे गए हैं।
स्वतंत्र जांच और कोर्ट निगरानी की भी मांग
कुछ याचिकाओं में मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में विशेष जांच कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए विशेष विशेषज्ञता की आवश्यकता है। साथ ही ट्रस्ट के वित्तीय दस्तावेजों के नियमित ऑडिट और सार्वजनिक प्रकटीकरण की भी मांग की गई है। अदालत ने इन सभी पहलुओं पर विचार करते हुए अगली सुनवाई 27 जुलाई निर्धारित की है।