76वें जन्मदिन पर नसीरुद्दीन शाह: वह बयान जिसने देशभर में छेड़ दी थी बड़ी बहस
हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह आज अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। शानदार अभिनय के साथ-साथ अपने बेबाक विचारों के लिए पहचान रखने वाले शाह का 2018 में दिया गया एक बयान लंबे समय तक चर्चा और विवाद का विषय बना रहा। उनके उस बयान पर देशभर में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं। आइए जानते हैं उस बयान का संदर्भ और नसीरुद्दीन शाह के फिल्मी सफर की खास बातें।
2018 का बयान जिसने छेड़ दी थी बहस
साल 2018 में एक इंटरव्यू के दौरान नसीरुद्दीन शाह ने देश के सामाजिक माहौल को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि उन्हें अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता होती है और इसी संदर्भ में उन्होंने कहा था कि “मुझे लगता है कि यह वह देश नहीं रह गया है, जिसमें मैं बड़ा हुआ हूं।” यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया, राजनीतिक गलियारों और विभिन्न मंचों पर व्यापक बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने उनके विचारों का समर्थन किया, जबकि कई लोगों ने इसकी आलोचना भी की।
बेबाक राय रखने के लिए जाने जाते हैं नसीरुद्दीन शाह
नसीरुद्दीन शाह का मानना रहा है कि एक कलाकार केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होता, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय भी रख सकता है। वर्षों से उन्होंने विभिन्न विषयों पर खुलकर अपनी बात रखी है। उनके कई बयान चर्चा का विषय बने, लेकिन उन्होंने हमेशा कहा कि वे वही कहते हैं जो उन्हें सही और ईमानदार लगता है। इसी बेबाक अंदाज ने उन्हें प्रशंसा के साथ-साथ आलोचना भी दिलाई।
छोटे किरदारों से राष्ट्रीय पुरस्कार तक का सफर
20 जुलाई 1950 को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में जन्मे नसीरुद्दीन शाह ने अभिनय की पढ़ाई नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) और फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) से की। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत छोटे किरदारों से की और बाद में ‘निशांत’, ‘मंथन’, ‘स्पर्श’, ‘मासूम’, ‘जाने भी दो यारों’, ‘सरफरोश’, ‘इश्किया’, ‘ए वेडनेसडे’ और ‘द डर्टी पिक्चर’ जैसी फिल्मों में अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया। उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के साथ पद्मश्री और पद्म भूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है।
आज भी थिएटर, फिल्मों और OTT पर सक्रिय
पांच दशक से अधिक लंबे करियर के बाद भी नसीरुद्दीन शाह अभिनय की दुनिया में सक्रिय हैं। थिएटर, फिल्मों और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उनका लगातार योगदान जारी है। उनकी पत्नी रत्ना पाठक शाह भी हिंदी फिल्म और रंगमंच की प्रतिष्ठित अभिनेत्री हैं, जबकि उनके बेटे विवान शाह भी अभिनय के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अपनी अलग अभिनय शैली और स्पष्ट विचारों के कारण नसीरुद्दीन शाह आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली कलाकारों में गिने जाते हैं।
बयान पर मतभेद, लेकिन अभिनय पर सर्वसम्मति
नसीरुद्दीन शाह के सामाजिक और राजनीतिक बयानों पर समय-समय पर मतभेद देखने को मिले हैं। हालांकि, उनके अभिनय कौशल और भारतीय सिनेमा में योगदान को लेकर व्यापक सम्मान रहा है। आलोचना और समर्थन के बीच उन्होंने हमेशा अपनी बात खुलकर रखने का रास्ता चुना, जिससे वह एक ऐसे कलाकार के रूप में पहचाने जाते हैं, जिनकी पहचान सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रही।