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सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान की बढ़ी बेचैनी, सांसद बोलीं- ‘भारत बिना हवाई हमले के भी हमें नुकसान पहुंचा सकता है’

भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित करने के फैसले के बाद पाकिस्तान में राजनीतिक और रणनीतिक चिंता लगातार बढ़ती दिख रही है। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली की सदस्य डॉ. शर्मिला फारूकी ने दावा किया है कि पानी को हथियार की तरह इस्तेमाल करना किसी देश को भूखा और आर्थिक रूप से कमजोर कर सकता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की कृषि, बिजली उत्पादन और बड़ी आबादी सिंधु नदी तंत्र पर निर्भर है, इसलिए इस संधि का भविष्य उनके देश के लिए बेहद अहम है।

सिंधु जल संधि पर भारत के फैसले से पाकिस्तान में चिंता

1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच जल बंटवारे का आधार रही है। अप्रैल 2025 में भारत द्वारा संधि को निलंबित किए जाने के बाद पाकिस्तान लगातार इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान के कई राजनीतिक नेताओं और सैन्य अधिकारियों ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। अब सांसद डॉ. शर्मिला फारूकी ने भी सार्वजनिक रूप से भारत के कदम पर सवाल उठाते हुए इसे पाकिस्तान की जल और खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताया है।

‘पानी का इस्तेमाल भी संघर्ष का माध्यम बन सकता है’

डॉ. शर्मिला फारूकी ने अपने एक लेख में कहा कि पानी केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन और अर्थव्यवस्था का आधार है। उनका कहना है कि यदि नदी के प्रवाह में बड़े स्तर पर बदलाव किए जाते हैं तो इसका असर खेती, पेयजल और ऊर्जा उत्पादन पर पड़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत के फैसले से पाकिस्तान के सामने खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं। हालांकि यह पाकिस्तान का आधिकारिक राजनीतिक पक्ष है, जिस पर भारत की ओर से अलग रुख अपनाया गया है।

संधि के प्रावधानों का दिया हवाला

पाकिस्तानी सांसद ने दावा किया कि सिंधु जल संधि के अनुच्छेद XII के अनुसार इसमें संशोधन या समाप्ति केवल दोनों देशों की आपसी सहमति से ही संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्व बैंक इस समझौते का एक महत्वपूर्ण पक्षकार है और ऐसे किसी भी बड़े कदम से पहले उसे विश्वास में लिया जाना चाहिए था। पाकिस्तान का कहना है कि संधि को एकतरफा निलंबित करने का प्रावधान इसमें नहीं है। वहीं भारत का रुख है कि सीमा पार आतंकवाद और बदलते हालात के मद्देनजर उसने अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप निर्णय लिया है।

पाकिस्तान ने बताई अपनी जल निर्भरता

डॉ. शर्मिला फारूकी के अनुसार पाकिस्तान की लगभग 90 प्रतिशत आबादी सिंधु नदी बेसिन पर निर्भर है। देश की अधिकांश कृषि भूमि की सिंचाई इसी नदी तंत्र से होती है और जलविद्युत उत्पादन का बड़ा हिस्सा भी इसी पर आधारित है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पास सीमित जल भंडारण क्षमता है और वर्ष के अधिकांश समय उसे पहले से संग्रहित पानी पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में यदि जल प्रवाह प्रभावित होता है तो इसका असर सीधे कृषि उत्पादन, रोजगार और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

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