सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने पर शरद पवार का केंद्र पर निशाना, बोले- सरकार ने दिखाई गैर-जिम्मेदारी
जंतर-मंतर पर लंबे समय से अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। एनसीपी (शरद पवार गुट) प्रमुख शरद पवार ने केंद्र सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों की चिंताओं को समय रहते गंभीरता से नहीं लिया गया और सरकार ने पूरे मामले में गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार किया।
सरकार के रवैये पर शरद पवार ने उठाए सवाल
बारामती में मीडिया से बातचीत के दौरान शरद पवार ने कहा कि सोनम वांगचुक के आंदोलन को जिस तरह संभाला गया, वह उचित नहीं था। उनके मुताबिक सरकार ने प्रदर्शनकारियों की मांगों पर समय रहते संवाद करने के बजाय हालात बिगड़ने का इंतजार किया। पवार ने कहा कि जब स्थिति गंभीर हो गई, तब जाकर वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया, जबकि पहले बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की जानी चाहिए थी।
छात्रों की मांगों को गंभीरता से लेने की अपील
शरद पवार ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर छात्रों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि कई राजनीतिक दलों ने आंदोलन का समर्थन किया और छात्रों की मांगों को जायज बताया, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से अपेक्षित पहल देखने को नहीं मिली। उन्होंने कहा कि शिक्षा और युवाओं से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता जरूरी है।
दिल्ली पुलिस ने कोर्ट के आदेश का दिया हवाला
दिल्ली पुलिस के अनुसार, सोनम वांगचुक की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने कहा कि यह कार्रवाई विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह और दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप की गई। प्रशासन का कहना है कि अनशन के कारण उनकी सेहत पर गंभीर असर पड़ रहा था, इसलिए आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना जरूरी था।
संसद में भी उठ सकता है मामला
शरद पवार ने संकेत दिया कि यह मुद्दा संसद के आगामी सत्र में भी उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि छात्रों और परीक्षा प्रणाली से जुड़े सवाल केवल एक व्यक्ति के आंदोलन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह व्यापक जनहित का विषय है। उनका मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे।