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UNSC की अस्थायी सीट के लिए भारत का अभियान शुरू, चीन ने समर्थन पर नहीं खोले पत्ते

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में 2028-29 कार्यकाल की अस्थायी सदस्यता के लिए भारत ने अपना आधिकारिक अभियान शुरू कर दिया है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में इसकी औपचारिक शुरुआत करते हुए सदस्य देशों से समर्थन की अपील की। इस बीच भारत की उम्मीदवारी पर चीन की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। हालांकि, बीजिंग ने समर्थन या विरोध में स्पष्ट रुख अपनाने के बजाय कहा है कि वह इस विषय पर ध्यान दे रहा है।

भारत की उम्मीदवारी पर चीन का सतर्क जवाब

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान से जब भारत की 2028-29 कार्यकाल के लिए UNSC की अस्थायी सीट की दावेदारी पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कोई स्पष्ट समर्थन नहीं दिया। उन्होंने केवल इतना कहा कि चीन इस विषय पर सामने आई जानकारी पर ध्यान दे रहा है। चीन का यह संतुलित बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र से जुड़े कई मुद्दों पर बीजिंग और नई दिल्ली के बीच मतभेद रहे हैं। फिलहाल चीन ने भारत की उम्मीदवारी को लेकर किसी आधिकारिक समर्थन या विरोध की घोषणा नहीं की है।

जयशंकर ने शुरू किया भारत का वैश्विक अभियान

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भारत के चुनाव अभियान की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के प्रति भारत का दृष्टिकोण SHANTI (Solidarity, Humanity, Accountability, Neutrality, Trust and Innovation) जैसे मूल्यों पर आधारित है, जिसका उद्देश्य नियम-आधारित व्यवस्था, विश्वास और समावेशी विकास को मजबूत करना है। उन्होंने सदस्य देशों से भारत की उम्मीदवारी का समर्थन करने की अपील करते हुए कहा कि भारत वैश्विक शांति, विकास और बहुपक्षीय सहयोग के लिए लगातार सक्रिय भूमिका निभाता रहा है।

अगले साल होगा चुनाव, ताजिकिस्तान से मुकाबला

UNSC की 2028-29 अवधि के लिए अस्थायी सदस्य का चुनाव जून 2027 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में होगा। एशिया-प्रशांत समूह की इस सीट के लिए भारत और ताजिकिस्तान आमने-सामने होंगे। कूटनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भारत को अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों का समर्थन मिलने की संभावना है, जबकि ताजिकिस्तान को इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के कई सदस्य देशों का समर्थन मिल सकता है। अंतिम निर्णय महासभा में होने वाले मतदान के आधार पर होगा।

UNSC में भारत का लंबा अनुभव

यदि भारत इस चुनाव में सफल होता है तो वह नौवीं बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य बनेगा। इससे पहले भारत 1950-51, 1967-68, 1972-73, 1977-78, 1984-85, 1991-92, 2011-12 और 2021-22 में अस्थायी सदस्य रह चुका है। पिछले कार्यकाल के दौरान भारत ने आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा, शांति स्थापना और वैश्विक स्वास्थ्य जैसे कई अहम मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई थी। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में सुधार और स्थायी सदस्यता की भी मांग करता रहा है।

स्थायी सदस्यता पर अब भी चीन की चुप्पी

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य—अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन—में से अमेरिका, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस सार्वजनिक रूप से सुरक्षा परिषद में सुधार के बाद भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन कर चुके हैं। वहीं चीन ने इस मुद्दे पर अब तक स्पष्ट समर्थन नहीं दिया है। हालांकि वर्तमान चुनाव स्थायी सदस्यता का नहीं बल्कि दो वर्षीय अस्थायी सदस्यता का है, फिर भी चीन का रुख अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या है UNSC और क्यों अहम है इसकी सदस्यता?

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद दुनिया में शांति और सुरक्षा बनाए रखने वाली सबसे प्रभावशाली संस्था मानी जाती है। इसके पांच स्थायी सदस्य—अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस—को वीटो का अधिकार प्राप्त है, जबकि 10 अस्थायी सदस्य दो वर्ष के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं। परिषद अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध, शांति मिशन और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेती है। ऐसे में इसकी सदस्यता किसी भी देश की वैश्विक कूटनीतिक भूमिका को मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर मानी जाती है।

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