कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लांट से जुड़े डेटा लीक का दावा, 19 हजार फाइलों को बताया गया संवेदनशील
तमिलनाडु के कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र से जुड़े कथित डेटा लीक के दावे ने सुरक्षा एजेंसियों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एक रैंसमवेयर समूह ने डार्क वेब पर प्लांट से संबंधित हजारों फाइलें होने का दावा किया है। हालांकि, इस मामले में अभी तक भारत सरकार या संबंधित एजेंसियों की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
डार्क वेब पर डेटा होने का दावा, 19 हजार फाइलें बताई गईं संवेदनशील
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, रैंसमवेयर समूह ‘वर्ल्ड लीक्स’ ने दावा किया है कि उसके पास कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना से जुड़ी बड़ी संख्या में डिजिटल फाइलें मौजूद हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब 8.58 लाख फाइलों में से लगभग 19 हजार फाइलों को अत्यधिक संवेदनशील बताया गया है। इन दस्तावेजों में कथित तौर पर परियोजना के कुछ इंफ्रास्ट्रक्चर डिज़ाइन, सप्लायर संबंधी जानकारी और अन्य तकनीकी रिकॉर्ड शामिल हैं। फिलहाल इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
रिएक्टर सिस्टम से जुड़े दस्तावेज शामिल होने की पुष्टि नहीं
मीडिया रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि सामने आए दस्तावेज परमाणु रिएक्टर के मुख्य (कोर) सिस्टम से संबंधित प्रतीत नहीं होते। दावा है कि इनमें यूनिट-3 और यूनिट-4 के वेंटिलेशन, कूलिंग सिस्टम, कंट्रोल रूम के लेआउट, स्वीकृत सप्लायरों की सूची और कुछ निरीक्षण संबंधी दस्तावेज शामिल हैं। इन सूचनाओं की सत्यता और संवेदनशीलता का आकलन संबंधित एजेंसियों द्वारा ही किया जा सकेगा।
2027 तक शुरू होने वाली नई इकाइयों से जुड़ी बताई जा रहीं फाइलें
रिपोर्ट के अनुसार, कथित तौर पर लीक हुई जानकारी उस कंपनी से जुड़ी हो सकती है जिसे वर्ष 2018 में कुडनकुलम परियोजना की यूनिट-3 और यूनिट-4 के लिए बुनियादी ढांचे के निर्माण और डिजाइन का कार्य मिला था। इन दोनों इकाइयों के चालू होने के बाद लगभग 2000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन की योजना है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि कथित डेटा वास्तव में परियोजना के वर्तमान संचालन को किस हद तक प्रभावित करता है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने जताई सतर्कता की जरूरत
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे से जुड़ी तकनीकी जानकारी अनधिकृत रूप से सार्वजनिक होती है, तो इसकी गंभीरता का आकलन करना आवश्यक होता है। हालांकि किसी भी संभावित सुरक्षा जोखिम का निष्कर्ष केवल आधिकारिक जांच के बाद ही निकाला जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में डिजिटल सुरक्षा प्रणालियों की नियमित समीक्षा और संवेदनशील डेटा की बेहतर सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है।
सरकारी पुष्टि का इंतजार, जांच के बाद ही स्थिति होगी स्पष्ट
अब तक भारत सरकार, न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) या अन्य संबंधित एजेंसियों ने इस कथित डेटा लीक पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। ऐसे में यह मामला फिलहाल मीडिया रिपोर्टों और रैंसमवेयर समूह के दावों तक सीमित है। यदि कोई जांच शुरू होती है या आधिकारिक पुष्टि सामने आती है, तभी इस घटना की वास्तविक प्रकृति और संभावित प्रभाव स्पष्ट हो सकेगा।