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राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष: ओम बिरला बोले- विधानमंडल लोकतंत्र की पाठशाला, संवाद और सीख ही इसकी सबसे बड़ी ताकत

राजस्थान विधानसभा के 75वें स्थापना वर्ष पर आयोजित अमृत महोत्सव में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय परंपराओं और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारियों पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि विधानमंडल केवल कानून बनाने या बहस करने का मंच नहीं, बल्कि लोकतंत्र की ऐसी पाठशाला है, जहां जनसेवा, संवाद और अनुशासन की सीख मिलती है। उन्होंने युवा विधायकों से वरिष्ठ सदस्यों के अनुभवों से सीख लेकर लोकतांत्रिक परंपराओं को और मजबूत करने का आह्वान किया।

दीप प्रज्वलन के साथ हुआ अमृत महोत्सव का शुभारंभ

जयपुर स्थित राजस्थान विधानसभा में 75वें स्थापना वर्ष के उपलक्ष्य में ‘विधायी गौरव यात्रा- वर्तमान एवं पूर्व विधायकों का समागम’ आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दीप प्रज्वलित कर किया। समारोह में वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने लोकतांत्रिक परंपराओं की निरंतरता और विधायी विरासत को नई ऊर्जा प्रदान की। आयोजन के दौरान विधानसभा के गौरवशाली इतिहास और लोकतांत्रिक योगदान को भी याद किया गया।

‘विधानमंडल लोकतंत्र की पाठशाला है’

अपने संबोधन में ओम बिरला ने कहा कि विधानमंडल केवल कानून बनाने वाली संस्था नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र की ऐसी पाठशाला है जहां जनप्रतिनिधि संवाद, अनुशासन, सहमति और जनसेवा के मूल्यों को आत्मसात करते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती केवल संविधान या नियमों से नहीं होती, बल्कि जनता के विश्वास, पारदर्शिता और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही से होती है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य करने का भी आग्रह किया।

राजस्थान विधानसभा को बताया अपने सार्वजनिक जीवन की पहली पाठशाला

लोकसभा अध्यक्ष ने अपने राजनीतिक जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि राजस्थान विधानसभा उनके सार्वजनिक जीवन की पहली पाठशाला रही है। यहां वरिष्ठ विधायकों से मिले अनुभवों और संसदीय मर्यादाओं ने उनके राजनीतिक और संसदीय जीवन को दिशा दी। उन्होंने कहा कि विधायक से सांसद और फिर लोकसभा अध्यक्ष तक की उनकी यात्रा में इस सदन में सीखे गए लोकतांत्रिक मूल्य और संसदीय परंपराएं हमेशा मार्गदर्शक बनी रहीं।

स्वस्थ बहस और संवाद को बताया लोकतंत्र की ताकत

ओम बिरला ने कहा कि लोकतंत्र में विचारों का मतभेद स्वाभाविक है, लेकिन संवाद और स्वस्थ बहस ही लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाते हैं। उन्होंने कहा कि सदन में होने वाली हर चर्चा भविष्य के लिए लोकतांत्रिक इतिहास का हिस्सा बन जाती है। इसलिए जनप्रतिनिधियों को तथ्यों और गरिमा के साथ अपनी बात रखनी चाहिए तथा दूसरों के विचारों को भी सम्मानपूर्वक सुनना चाहिए।

राजस्थान की लोकतांत्रिक विरासत का किया उल्लेख

उन्होंने कहा कि राजस्थान केवल वीरों की भूमि ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की भी समृद्ध धरोहर है। पिछले 75 वर्षों में विधानसभा ने अनेक महत्वपूर्ण कानूनों, सार्थक चर्चाओं और जनहित के फैसलों के माध्यम से लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि विधानसभा आम जनता की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने और उनके समाधान का सबसे प्रभावी मंच है।

युवा विधायकों को दिए सीखने और संवाद के मंत्र

लोकसभा अध्यक्ष ने युवा विधायकों से आग्रह किया कि वे वरिष्ठ सदस्यों के अनुभवों से सीखने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि सदन में अधिक समय बिताना, संसदीय कार्यवाही को ध्यान से समझना और दूसरों के विचारों को सुनना एक सफल जनप्रतिनिधि बनने की पहली शर्त है। उनके अनुसार, लोकतंत्र में सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती और यही संसदीय परंपराओं को मजबूत बनाती है।

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Stv News Rajasthan

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