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Nail Fungus: नाखून का पीला पड़ना और मोटा होना हो सकता है फंगल इन्फेक्शन का संकेत, जानें लक्षण और बचाव

अगर आपके हाथ या पैरों के नाखूनों का रंग पीला पड़ने लगा है, वे मोटे हो रहे हैं या आसानी से टूटने लगे हैं, तो इसे सामान्य बदलाव समझकर नजरअंदाज न करें। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ये लक्षण नेल फंगस (Nail Fungus) यानी नाखूनों में होने वाले फंगल संक्रमण की ओर इशारा कर सकते हैं। समय रहते पहचान और सही इलाज से इस समस्या को बढ़ने से रोका जा सकता है।

क्या है नेल फंगस?

नेल फंगस, जिसे चिकित्सकीय भाषा में ओनिकोमाइकोसिस (Onychomycosis) कहा जाता है, नाखूनों में होने वाला एक सामान्य फंगल संक्रमण है। यह संक्रमण तब होता है जब फंगस नाखून के नीचे या उसके आसपास की त्वचा में प्रवेश कर जाता है। धीरे-धीरे यह संक्रमण पूरे नाखून को प्रभावित कर सकता है, जिससे उसका रंग, आकार और मजबूती बदलने लगती है।

नेल फंगस के शुरुआती लक्षण

नेल फंगस की शुरुआत अक्सर हल्के बदलावों से होती है। प्रमुख लक्षणों में नाखून का पीला, सफेद या भूरा पड़ना, नाखून का मोटा होना, भुरभुरा होकर टूटना, आकार में बदलाव आना और नाखून से असामान्य बदबू आना शामिल हैं। यदि ये लक्षण लगातार बने रहें, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

पैर के नाखूनों में ज्यादा क्यों होता है संक्रमण?

विशेषज्ञों के अनुसार, हाथों की तुलना में पैरों के नाखूनों में फंगल संक्रमण अधिक देखने को मिलता है। इसका कारण यह है कि पैर लंबे समय तक जूते और मोजों में बंद रहते हैं, जिससे वहां नमी और गर्माहट बनी रहती है। यह वातावरण फंगस के बढ़ने के लिए अनुकूल होता है। इसके अलावा पैरों में रक्त संचार अपेक्षाकृत कम होने के कारण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता संक्रमण से लड़ने में अधिक समय ले सकती है।

किन कारणों से बढ़ता है नेल फंगस का खतरा?

नेल फंगस होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। बढ़ती उम्र, लंबे समय तक पसीने वाले जूते पहनना, सार्वजनिक स्विमिंग पूल या बाथरूम में नंगे पैर चलना, नाखून या उसके आसपास की त्वचा में चोट लगना, मधुमेह (डायबिटीज), कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली और रक्त संचार संबंधी समस्याएं संक्रमण का खतरा बढ़ा सकती हैं।

कैसे करें बचाव?

नेल फंगस से बचने के लिए नाखूनों की नियमित सफाई करें और उन्हें सीधा काटें। रोजाना साफ और सूखे मोजे पहनें तथा जूतों को अच्छी तरह सूखने दें। पेडीक्योर या मेनीक्योर कराते समय यह सुनिश्चित करें कि इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरण पूरी तरह साफ और सैनिटाइज हों। सार्वजनिक स्थानों जैसे स्विमिंग पूल या चेंजिंग रूम में चप्पल पहनकर चलना भी संक्रमण से बचाव में मददगार हो सकता है।

कब लें डॉक्टर की सलाह?

यदि घरेलू देखभाल के बावजूद नाखूनों का रंग लगातार बदल रहा है, वे मोटे या टूटने लगे हैं या आपको डायबिटीज जैसी बीमारी है, तो त्वचा रोग विशेषज्ञ (Dermatologist) से परामर्श लेना चाहिए। समय पर इलाज से संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है। डॉक्टर आवश्यकता के अनुसार एंटीफंगल दवाएं, क्रीम या अन्य उपचार की सलाह दे सकते हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी लक्षण या स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में योग्य डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

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