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राजस्थान: बीजेपी विधायक से आई-कार्ड मांगने पर टोल प्लाजा में विवाद, टोलकर्मी गिरफ्तार

राजस्थान: बीजेपी विधायक से आई-कार्ड मांगने पर बवाल

जयपुर जिले के मनोहरपुर-दौसा हाईवे स्थित नेकावाला टोल प्लाजा पर जमवारामगढ़ से भाजपा विधायक महेंद्रपाल मीणा और टोलकर्मियों के बीच पहचान पत्र मांगने को लेकर विवाद हो गया। विधायक की शिकायत के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और टोल मैनेजर व संबंधित कर्मचारी को थाने ले गई। पूछताछ के बाद मैनेजर को छोड़ दिया गया, जबकि एक टोलकर्मी को शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। घटना के बाद टोल प्लाजा पर कुछ समय के लिए तनावपूर्ण माहौल बना रहा।

आई-कार्ड मांगने पर शुरू हुआ विवाद

जानकारी के अनुसार रविवार दोपहर भाजपा विधायक महेंद्रपाल मीणा अपने वाहन से मनोहरपुर-दौसा हाईवे पर स्थित नेकावाला टोल प्लाजा से गुजर रहे थे। ड्यूटी पर तैनात टोलकर्मी ने उन्हें पहचान नहीं पाने पर परिचय पत्र दिखाने का अनुरोध किया। इसी बात को लेकर विधायक और टोलकर्मी के बीच बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते विवाद में बदल गई। मामले की सूचना मिलने पर रायसर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करते हुए संबंधित कर्मचारी तथा टोल मैनेजर को पूछताछ के लिए थाने ले गई।

पुलिस ने शिकायत के आधार पर की कार्रवाई

रायसर थाना पुलिस ने विधायक की शिकायत मिलने के बाद मामले में आवश्यक कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार टोल मैनेजर को समझाइश देकर भविष्य में सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए, जबकि ड्यूटी पर मौजूद टोलकर्मी गुलशन के खिलाफ शांतिभंग की धाराओं के तहत कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों को रिकॉर्ड में लिया गया है और नियमानुसार आगे की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

टोल प्रबंधन ने एनएचएआई नियमों का किया उल्लेख

टोल प्लाजा प्रबंधन का कहना है कि कर्मचारी ने केवल पहचान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से परिचय पत्र मांगा था। प्रबंधन के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के दिशा-निर्देशों के तहत टोल शुल्क में छूट का लाभ लेने वाले जनप्रतिनिधियों या अन्य पात्र व्यक्तियों से आवश्यकता पड़ने पर पहचान पत्र मांगना नियमों के अनुरूप है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि कई बार वाहनों पर फर्जी तरीके से ‘विधायक’ या अन्य पदनाम लिखकर टोल छूट लेने के प्रयास सामने आते हैं, इसलिए पहचान का सत्यापन करना कर्मचारियों की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है।

नेकावाला टोल प्लाजा पर पहले भी हो चुका है विवाद

यह पहला अवसर नहीं है जब नेकावाला टोल प्लाजा विवादों में आया हो। वर्ष 2022 में भी अलवर शहर के तत्कालीन विधायक संजय शर्मा और टोलकर्मियों के बीच पहचान पत्र मांगने को लेकर कहासुनी हुई थी। उस समय भी मामला बढ़ने पर मौके पर मौजूद लोगों ने हस्तक्षेप कर स्थिति को शांत कराया था। बाद में शिकायत के आधार पर पुलिस ने कुछ टोलकर्मियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। ताजा घटना के बाद एक बार फिर टोल प्लाजा पर पहचान सत्यापन की प्रक्रिया और जनप्रतिनिधियों से जुड़े प्रोटोकॉल को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

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