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पेपर लीक के खिलाफ जयपुर में युवाओं की दौड़, NSUI की मैराथन में पारदर्शी भर्ती की उठी मांग

पेपर लीक के खिलाफ जयपुर में NSUI की 5KM मैराथन

राजधानी जयपुर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के विरोध में सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और युवाओं ने ‘Run Against Paper Leak’ मैराथन में भाग लिया। राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, निष्पक्ष परीक्षाओं और पेपर लीक मामलों में सख्त कार्रवाई की मांग प्रमुखता से उठाई गई।

राजस्थान विश्वविद्यालय से अल्बर्ट हॉल तक निकली मैराथन

मैराथन की शुरुआत राजस्थान विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार से हुई, जो अल्बर्ट हॉल तक पहुंचने के बाद वापस विश्वविद्यालय परिसर में संपन्न हुई। करीब पांच किलोमीटर लंबे इस आयोजन में बड़ी संख्या में छात्र, युवा और NSUI कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रतिभागियों ने हाथों में बैनर और संदेश लिखी तख्तियां लेकर परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा की मांग को बुलंद किया।

वरिष्ठ नेताओं ने भी दर्ज कराई मौजूदगी

कार्यक्रम में NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ के साथ नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, विधायक मनीष यादव और विधायक शिखा मील बराला भी मौजूद रहे। सभी नेताओं ने युवाओं के साथ मैराथन में भाग लेकर उनका उत्साह बढ़ाया और भर्ती परीक्षाओं को निष्पक्ष एवं पारदर्शी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में छात्र संगठनों और युवाओं की भागीदारी देखने को मिली।

पेपर लीक से युवाओं के भविष्य पर चिंता

मैराथन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने लाखों अभ्यर्थियों की मेहनत और भविष्य को प्रभावित किया है। वर्षों की तैयारी के बाद भी यदि परीक्षाओं की गोपनीयता भंग होती है तो इससे युवाओं का भरोसा कमजोर होता है। उन्होंने मांग की कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

‘छात्रों की गूंज’ अभियान रहेगा जारी

आयोजन के समापन पर मैराथन के विजेताओं को नकद पुरस्कार और प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। NSUI ने घोषणा की कि ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत आगे भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनके माध्यम से छात्रों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया जाएगा। संगठन का कहना है कि जब तक भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्ष व्यवस्था सुनिश्चित नहीं होती, तब तक युवाओं की आवाज इसी तरह बुलंद होती रहेगी।

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