कोटा में डॉक्टरों की बड़ी चुनौती: 12 घंटे तक सिर में फंसी रही कुल्हाड़ी, जटिल सर्जरी के बाद निकाला हथियार
राजस्थान के बारां जिले में आपसी रंजिश के चलते हुए जानलेवा हमले के बाद एक युवक के सिर में कुल्हाड़ी करीब 12 घंटे तक फंसी रही। गंभीर हालत में उसे कोटा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने करीब तीन घंटे तक चली जटिल न्यूरोसर्जरी के बाद कुल्हाड़ी को सफलतापूर्वक बाहर निकाला। फिलहाल मरीज की हालत नाजुक बनी हुई है और संक्रमण का खतरा बरकरार है।
सोते समय हुआ जानलेवा हमला
पुलिस के अनुसार बारां जिले के भंवरगढ़ क्षेत्र निवासी रामजीलाल सहरिया पर शनिवार रात उस समय हमला हुआ, जब वह अपने घर में सो रहा था। अज्ञात हमलावर ने उसके सिर पर कुल्हाड़ी से वार किया, जिससे हथियार सिर में ही धंस गया। गंभीर रूप से घायल युवक को पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया और बाद में बेहतर इलाज के लिए कोटा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। पुलिस हमले के कारणों और आरोपी की तलाश में जुटी है।
तीन घंटे चली जटिल न्यूरोसर्जरी
कोटा मेडिकल कॉलेज के न्यूरोसर्जनों ने मरीज का ऑपरेशन कर सिर में फंसी कुल्हाड़ी निकाली। डॉक्टरों के अनुसार कुल्हाड़ी निकालने के लिए पहले सिर की हड्डी का एक हिस्सा विशेष उपकरणों की मदद से काटना पड़ा। पूरी सर्जरी करीब तीन घंटे तक चली। ऑपरेशन के दौरान लगातार रक्तस्राव, कम रक्तचाप और सांस लेने में परेशानी जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। मरीज को रक्त चढ़ाया गया और सांस की नली डालने के लिए ट्रेकियोस्टोमी भी करनी पड़ी।
संक्रमण का खतरा, हालत अभी भी नाजुक
चिकित्सकों का कहना है कि कुल्हाड़ी लंबे समय तक सिर में फंसी रहने और उसके जंग लगे होने के कारण संक्रमण का खतरा बना हुआ है। फिलहाल मरीज को गहन चिकित्सा इकाई में निगरानी में रखा गया है। डॉक्टरों के मुताबिक अगले चार से पांच दिन मरीज की स्थिति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होंगे और इसी अवधि में उसकी रिकवरी का आकलन किया जाएगा।
इलाज में देरी को लेकर उठे सवाल
घटना के बाद उपचार में देरी को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आया है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि रेफर किए जाने के बावजूद मरीज को समय पर अस्पताल में बेड नहीं मिला, जिससे इलाज शुरू होने में कई घंटे लग गए। उनका दावा है कि जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद उपचार शुरू हुआ। वहीं अस्पताल प्रशासन का कहना है कि चिकित्सकीय टीम ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी करते हुए मरीज का इलाज शुरू किया और पूरी प्राथमिकता के साथ जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
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