SMS अस्पताल की बड़ी उपलब्धि: बिना ओपन सर्जरी महिला के लिवर, स्प्लीन और फेफड़े से निकाले तीन हाइडेटिड सिस्ट
जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल ने जटिल सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। अस्पताल के सर्जरी विभाग ने 45 वर्षीय महिला के लिवर, स्प्लीन और दाएं फेफड़े में मौजूद हाइडेटिड सिस्ट को अत्याधुनिक मिनिमली इनवेसिव तकनीक से सफलतापूर्वक निकाल दिया। इस प्रक्रिया में मरीज को ओपन सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ी, जिससे रिकवरी तेज और जोखिम कम रहा।
एक ही मरीज में तीन अंगों में मिला दुर्लभ संक्रमण
चिकित्सकों के अनुसार जांच के दौरान महिला के लिवर, स्प्लीन और दाएं फेफड़े में अलग-अलग आकार के हाइडेटिड सिस्ट पाए गए। एक ही मरीज में इन तीनों अंगों में एक साथ हाइडेटिड सिस्ट मिलना बेहद दुर्लभ माना जाता है। इस चुनौतीपूर्ण स्थिति के कारण सर्जरी की विस्तृत योजना बनाई गई और आधुनिक तकनीकों की मदद से सुरक्षित उपचार सुनिश्चित किया गया।
लेप्रोस्कोपी और VATS तकनीक से हुई सफल सर्जरी
डॉक्टरों ने लिवर और स्प्लीन के सिस्ट को लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के माध्यम से तथा फेफड़े के सिस्ट को वीडियो-असिस्टेड थोराकोस्कोपिक सर्जरी (VATS) तकनीक से हटाया। ऑपरेशन के दौरान सिस्ट को सुरक्षित तरीके से निकालने के लिए विशेष सावधानी बरती गई, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा कम रहा और मरीज को पारंपरिक ओपन सर्जरी की आवश्यकता नहीं पड़ी।
मिनिमली इनवेसिव तकनीक से मरीज को मिले कई लाभ
सर्जरी विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार इस आधुनिक तकनीक के उपयोग से मरीज को कम दर्द, कम रक्तस्राव, संक्रमण का कम जोखिम और तेजी से स्वस्थ होने जैसे महत्वपूर्ण लाभ मिले। ऑपरेशन के दौरान सी-आर्म मशीन की सहायता से सिस्ट की स्थिति का सटीक आकलन किया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और प्रभावी ढंग से पूरी की जा सकी।
विशेषज्ञ डॉक्टरों और मेडिकल टीम की रही अहम भूमिका
इस जटिल सर्जरी का नेतृत्व वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. राजेंद्र बागड़ी ने किया। सर्जिकल टीम, एनेस्थीसिया विशेषज्ञों, नर्सिंग स्टाफ और ऑपरेशन थिएटर टीम के समन्वित प्रयास से यह दुर्लभ ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। अस्पताल प्रशासन ने इसे आधुनिक चिकित्सा तकनीक और टीमवर्क का उत्कृष्ट उदाहरण बताया है।
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