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नेपाल में बालेन शाह के खिलाफ बढ़ा जनाक्रोश, बेदखली अभियान पर सड़कों पर उतरे हजारों लोग

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह को अब अपनी ही नीतियों को लेकर जनता के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। राजधानी काठमांडू में नदी किनारे बनी बस्तियों को हटाने के अभियान के खिलाफ बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार ने पुनर्वास की उचित व्यवस्था किए बिना हजारों परिवारों को बेघर कर दिया, जबकि सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई अतिक्रमण हटाने और नदी तटों को सुरक्षित बनाने के लिए की जा रही है।

नदी किनारे अतिक्रमण हटाने के फैसले से बढ़ा विवाद

काठमांडू में विरोध प्रदर्शनों की सबसे बड़ी वजह सरकार का नदी किनारे बसे अनधिकृत निर्माणों को हटाने का अभियान है। बालेन शाह लंबे समय से राजधानी को अतिक्रमण मुक्त बनाने और नदी तटों के संरक्षण की बात करते रहे हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी सरकार ने इस अभियान को तेज कर दिया। प्रशासन का कहना है कि यह कदम पर्यावरण संरक्षण, बाढ़ के खतरे को कम करने और शहरी विकास के लिए जरूरी है, लेकिन प्रभावित परिवार इसे अपने आशियाने पर सीधा हमला मान रहे हैं।

हजारों परिवार प्रभावित, पुनर्वास पर उठे सवाल

सरकारी कार्रवाई के बाद बड़ी संख्या में परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। स्थानीय संगठनों का आरोप है कि बेदखली से पहले प्रभावित लोगों के पुनर्वास की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई। कई परिवार अस्थायी शिविरों में रहने को मजबूर हैं, जबकि कुछ के सामने रहने और रोजगार दोनों का संकट खड़ा हो गया है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों पर इस कार्रवाई का सबसे अधिक असर पड़ा है और सरकार को स्थायी पुनर्वास योजना लागू करनी चाहिए।

काठमांडू की सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी

राजधानी काठमांडू के माइतीघर और सिंहदरबार सचिवालय के बाहर सैकड़ों लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से बेघर हुए परिवारों के लिए स्थायी आवास, मानवाधिकारों की सुरक्षा और कथित गैरकानूनी गिरफ्तारियों को समाप्त करने की मांग की। ‘यूनाइटेड नेशनल स्क्वाटर्स फ्रंट’ सहित कई सामाजिक संगठनों ने सरकार पर बिना पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था के बेदखली अभियान चलाने का आरोप लगाया। प्रदर्शन के दौरान सरकार विरोधी नारे भी लगाए गए।

हिरासत और पुलिस कार्रवाई पर भी उठे सवाल

प्रदर्शन के दौरान कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं और आंदोलनकारियों को हिरासत में लिए जाने के बाद विवाद और गहरा गया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि गिरफ्तार लोगों के साथ कठोर व्यवहार किया गया और उन्हें जल्द रिहा किया जाए। दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि कुछ लोगों ने सरकारी कार्यों में बाधा डाली थी, जिसके चलते कानूनी कार्रवाई की गई। पुलिस का दावा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं।

सरकार का पक्ष और आगे की चुनौती

सरकार का कहना है कि राजधानी में अवैध कब्जों को हटाना कानून के दायरे में की जा रही कार्रवाई है और शहर के दीर्घकालिक विकास के लिए यह जरूरी है। हालांकि बढ़ते विरोध ने सरकार के सामने पुनर्वास और सामाजिक संतुलन की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ प्रभावित परिवारों के लिए सम्मानजनक पुनर्वास की व्यवस्था करना भी उतना ही आवश्यक है, ताकि विकास और मानवीय संवेदनाओं के बीच संतुलन बना रहे।

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