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कैंसर की समय पर पहचान कैसे होती है? जानिए कौन-कौन से स्क्रीनिंग टेस्ट बचा सकते हैं जान

कैंसर का नाम सुनते ही अधिकांश लोग घबरा जाते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बीमारी का पता शुरुआती चरण में चल जाए तो इसके सफल इलाज की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसी उद्देश्य से कैंसर स्क्रीनिंग की जाती है, जिससे लक्षण दिखाई देने से पहले ही कैंसर या कैंसर बनने वाले बदलावों का पता लगाया जा सकता है। हालांकि, सभी लोगों के लिए हर टेस्ट जरूरी नहीं होता। स्क्रीनिंग उम्र, जोखिम कारकों और डॉक्टर की सलाह के आधार पर कराई जाती है।

ब्रेस्ट कैंसर की जांच: मैमोग्राम

महिलाओं में सबसे सामान्य कैंसरों में ब्रेस्ट कैंसर शामिल है। इसकी शुरुआती पहचान के लिए मैमोग्राम (Mammogram) सबसे प्रभावी स्क्रीनिंग टेस्ट माना जाता है। यह स्तन का विशेष एक्स-रे होता है, जिससे छोटी गांठ या असामान्य बदलाव का भी पता लगाया जा सकता है। किस उम्र से और कितनी बार मैमोग्राम कराना चाहिए, यह महिला की उम्र, पारिवारिक इतिहास और व्यक्तिगत जोखिम के आधार पर डॉक्टर तय करते हैं।

सर्वाइकल कैंसर: पैप स्मीयर और HPV टेस्ट

सर्वाइकल कैंसर का समय रहते पता लगाना संभव है। इसके लिए पैप स्मीयर (Pap Smear) और एचपीवी (HPV) टेस्ट किए जाते हैं। इस जांच में गर्भाशय ग्रीवा से कोशिकाओं का छोटा नमूना लेकर उनकी जांच की जाती है। इससे कैंसर बनने से पहले होने वाले बदलावों या ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण का पता लगाया जा सकता है। विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार, योग्य आयु वर्ग की महिलाओं को नियमित अंतराल पर यह जांच करानी चाहिए।

कोलोरेक्टल कैंसर: कोलोनोस्कोपी और स्टूल टेस्ट

बड़ी आंत और मलाशय के कैंसर की जांच के लिए कोलोनोस्कोपी (Colonoscopy) और स्टूल टेस्ट प्रमुख तरीके हैं। कोलोनोस्कोपी के दौरान कैमरे वाली एक पतली लचीली ट्यूब के जरिए आंत की जांच की जाती है। यदि पॉलीप्स पाए जाते हैं, तो उन्हें कैंसर बनने से पहले हटाया जा सकता है। वहीं, स्टूल टेस्ट के जरिए मल में छिपे रक्त या अन्य असामान्य संकेतों की जांच की जाती है। डॉक्टर उम्र और जोखिम के अनुसार उचित जांच की सलाह देते हैं।

लंग्स कैंसर: लो-डोज सीटी स्कैन

फेफड़ों के कैंसर का खतरा विशेष रूप से लंबे समय तक धूम्रपान करने वाले लोगों में अधिक होता है। ऐसे उच्च जोखिम वाले लोगों के लिए लो-डोज सीटी स्कैन (LDCT) की सलाह दी जाती है। यह जांच फेफड़ों की विस्तृत तस्वीर उपलब्ध कराती है और शुरुआती अवस्था में असामान्य बदलावों का पता लगाने में मदद करती है। यह स्क्रीनिंग केवल उन लोगों के लिए उपयुक्त होती है जो निर्धारित जोखिम श्रेणी में आते हैं।

प्रोस्टेट कैंसर: PSA ब्लड टेस्ट

पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर की शुरुआती जांच के लिए पीएसए (PSA) ब्लड टेस्ट किया जाता है। इसमें खून में प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन (PSA) का स्तर मापा जाता है। यदि इसका स्तर सामान्य से अधिक मिलता है, तो डॉक्टर आगे की जांच, जैसे एमआरआई या बायोप्सी, की सलाह दे सकते हैं। हालांकि, केवल PSA का बढ़ा हुआ स्तर कैंसर की पुष्टि नहीं करता, इसलिए अंतिम निर्णय अन्य चिकित्सीय जांचों के आधार पर लिया जाता है।

स्क्रीनिंग से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार, हर व्यक्ति को सभी कैंसर स्क्रीनिंग टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होती। उम्र, पारिवारिक इतिहास, धूम्रपान, जीवनशैली और अन्य जोखिम कारकों के आधार पर डॉक्टर तय करते हैं कि किस व्यक्ति को कौन-सी जांच और कितनी बार करानी चाहिए। किसी भी तरह के लक्षण दिखाई देने पर स्वयं इलाज करने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।

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