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ज्ञानवापी-काशी विश्वनाथ विवाद में मध्यस्थता पर असहमति, मुस्लिम पक्ष ने बैठक से किया इनकार

वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद विवाद में सुप्रीम कोर्ट की ओर से आपसी सहमति और मध्यस्थता के जरिए समाधान तलाशने के सुझाव के बीच नया घटनाक्रम सामने आया है। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने स्पष्ट किया है कि वह प्रस्तावित मध्यस्थता बैठक में शामिल नहीं होगी। वहीं, हिंदू पक्ष के कुछ वादियों ने भी कहा है कि वे न्यायालय के अंतिम फैसले को प्राथमिकता देते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या सुझाव दिया?

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विवाद का समाधान आपसी सहमति, लोक अदालत या मध्यस्थता के माध्यम से तलाशने की संभावना पर विचार करने का सुझाव दिया। इसी क्रम में जिला एवं सत्र न्यायालय स्तर पर मध्यस्थता की प्रक्रिया के लिए बैठक प्रस्तावित की गई थी। अदालत की मंशा थी कि यदि दोनों पक्ष सहमत हों तो लंबे समय से लंबित विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान तलाशा जा सके।

मुस्लिम पक्ष ने बैठक में शामिल होने से किया इनकार

अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के संयुक्त सचिव एस.एम. यासीन ने एक बयान जारी कर कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से भेजा गया आमंत्रण बाध्यकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि कमेटी ने निर्णय लिया है कि वह प्रस्तावित मध्यस्थता बैठक में हिस्सा नहीं लेगी। उनके अनुसार, ज्ञानवापी जैसा संवेदनशील मामला न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही सुलझाया जाना चाहिए और कमेटी अदालत के फैसले का इंतजार करेगी।

हिंदू पक्ष ने भी कोर्ट से अंतिम निर्णय की मांग की

दूसरी ओर, ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामले की वादियों में शामिल लक्ष्मी देवी ने कहा कि वे मध्यस्थता की बजाय अदालत से अंतिम फैसला चाहती हैं। उनका कहना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है तो अलग बात है, लेकिन उनकी प्राथमिकता न्यायालय के माध्यम से विवाद का समाधान है। उन्होंने मामले में हिंदू पक्ष के दावों के अनुरूप निर्णय की मांग भी दोहराई।

लोक अदालत के जरिए समाधान की थी उम्मीद

सुप्रीम कोर्ट की पहल के तहत विशेष लोक अदालत में दोनों पक्षों के बीच बातचीत की संभावना बनाई गई थी। अदालत को उम्मीद थी कि संवाद के जरिए किसी सहमति तक पहुंचा जा सकता है। हालांकि, दोनों पक्षों के मौजूदा रुख को देखते हुए फिलहाल मध्यस्थता की संभावना कमजोर दिखाई दे रही है और अब मामले के न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ने की संभावना अधिक मानी जा रही है।

मामले पर बनी रहेगी न्यायालय की नजर

ज्ञानवापी-काशी विश्वनाथ विवाद देश के सबसे चर्चित धार्मिक और कानूनी मामलों में शामिल है। ऐसे में अब सभी की नजर अदालत की आगामी सुनवाई और आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी रहेगी। यदि भविष्य में दोनों पक्ष बातचीत के लिए तैयार होते हैं तो मध्यस्थता का विकल्प फिर खुल सकता है, लेकिन फिलहाल मामला न्यायालय में ही आगे बढ़ता दिख रहा है।

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