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बीमारी, संघर्ष और मां के समर्पण ने दिलाई IIT में जगह, गुंजन की प्रेरक कहानी

बीमारी से जंग जीत गुंजन ने हासिल किया IIT दिल्ली में दाखिला

बिहार के सीतामढ़ी निवासी गुंजन कुमार ने साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के सामने कठिन से कठिन परिस्थितियां भी हार मान लेती हैं। गंभीर बीमारी, तीन महीने तक बिस्तर पर रहने और 70 प्रतिशत से अधिक दृष्टि हानि जैसी चुनौतियों के बावजूद उन्होंने JEE Main और JEE Advanced में शानदार प्रदर्शन किया। इस सफलता के पीछे उनकी मां का त्याग और समर्पण सबसे बड़ी ताकत बना। अब गुंजन का चयन IIT दिल्ली के अबू धाबी कैंपस में कंप्यूटर साइंस कोर्स के लिए हुआ है।

बीमारी ने रोकी पढ़ाई, लेकिन हौसला नहीं टूटा

वर्ष 2023 में गुंजन JEE की तैयारी के लिए कोटा गए थे। तैयारी के दौरान उन्हें न्यूमोथोरैक्स (Collapsed Lung) की गंभीर बीमारी हो गई। सर्जरी के बाद करीब तीन महीने तक उन्हें पूरी तरह बिस्तर पर रहना पड़ा। इसी दौरान उनकी नियमित पढ़ाई और कोचिंग छूट गई। साथ ही 70 प्रतिशत से अधिक दृष्टि हानि के कारण उन्हें 9.5 पावर का चश्मा पहनना पड़ता है। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और स्वास्थ्य ठीक होने के बाद फिर से तैयारी शुरू कर दी।

मां बनीं शिक्षक, खुद तैयार किए पढ़ाई के नोट्स

गुंजन की मां गुंजा कुमारी, जो सोशल साइंस में बी.एड. डिग्रीधारी गृहिणी हैं, बेटे की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आईं। उन्होंने बेटे की ऑनलाइन कोचिंग क्लास खुद अटेंड की, हर लेक्चर के विस्तृत हस्तलिखित नोट्स तैयार किए और नियमित रूप से उनका रिवीजन भी कराया। एक घंटे की क्लास के नोट्स तैयार करने में उन्हें करीब ढाई घंटे लगते थे, लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं छोड़ी।

तीन सप्ताह की तैयारी में हासिल की शानदार सफलता

दिसंबर में पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद गुंजन के पास JEE Main की तैयारी के लिए केवल तीन सप्ताह का समय था। उन्होंने मां के बनाए नोट्स के सहारे तैयारी की और JEE Main में 91.8 पर्सेंटाइल हासिल की। इसके बाद JEE Advanced में PwD-OBC कैटेगरी में 50वीं और कॉमन PwD कैटेगरी में 120वीं रैंक प्राप्त कर उन्होंने IIT में प्रवेश का सपना साकार कर दिखाया।

IIT दिल्ली अबू धाबी कैंपस में मिला दाखिला

गुंजन का चयन IIT दिल्ली के अबू धाबी कैंपस में कंप्यूटर साइंस कोर्स के लिए हुआ है। उनका कहना है कि परीक्षाएं केवल ज्ञान की नहीं, बल्कि धैर्य, साहस और आत्मविश्वास की भी परीक्षा होती हैं। वहीं उनकी मां का कहना है कि बेटे का सपना ही उनका सपना था और उसे पूरा करने के लिए हर मुश्किल स्वीकार थी। गुंजन की यह कहानी संघर्ष, परिवार के सहयोग और अटूट संकल्प की प्रेरणादायक मिसाल बन गई है।

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