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PoK में फिर उभरा JAAC आंदोलन, 15 जुलाई के मार्च की चेतावनी से बढ़ा तनाव

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) और प्रशासन के बीच टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि 14 जुलाई तक उसकी मांगों पर अमल नहीं हुआ तो 15 जुलाई से मुजफ्फराबाद की ओर लंबा मार्च दोबारा शुरू किया जाएगा। दूसरी ओर, पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई तथा मानवाधिकारों को लेकर उठ रहे सवालों ने पूरे घटनाक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।

JAAC ने सरकार को दी नई समयसीमा, 15 जुलाई से फिर मार्च का ऐलान

जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने घोषणा की है कि यदि 14 जुलाई तक प्रशासन उनकी मांगों को लागू नहीं करता है तो 15 जुलाई को मुजफ्फराबाद की ओर लंबा मार्च दोबारा शुरू किया जाएगा। संगठन के नेताओं का कहना है कि पहले घोषित कार्यक्रम को केवल रोका गया था, समाप्त नहीं किया गया। उनका आरोप है कि प्रशासन ने पहले हुए समझौते के बावजूद वादों को पूरा नहीं किया। JAAC ने स्थानीय लोगों से आंदोलन की तैयारी करने की अपील की है और कहा है कि आगे की रणनीति 15 जुलाई को सार्वजनिक की जाएगी।

बिजली, आटा और स्थानीय अधिकारों को लेकर लंबे समय से जारी है आंदोलन

JAAC का आंदोलन मुख्य रूप से बिजली पर सब्सिडी, आटे की कीमतों में राहत और स्थानीय संसाधनों पर क्षेत्रीय लोगों के अधिकार जैसे मुद्दों को लेकर चल रहा है। वर्ष 2024 से जारी इस आंदोलन के दौरान अक्टूबर 2025 में प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच समझौता हुआ था। हालांकि JAAC का आरोप है कि सरकार ने समझौते की अधिकांश शर्तों को लागू नहीं किया। इसी वजह से आंदोलन फिर से तेज हो गया है और संगठन का कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, विरोध जारी रहेगा।

प्रदर्शन पर कार्रवाई को लेकर मानवाधिकारों के सवाल

JAAC और अन्य स्थानीय संगठनों का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई है। संगठन का दावा है कि हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया और कई प्रदर्शनकारियों की मौत हुई है। स्वतंत्र रूप से इन सभी दावों की पुष्टि नहीं हुई है। पाकिस्तान सरकार ने दूसरी ओर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई को आवश्यक बताया है। हालात को लेकर विभिन्न मानवाधिकार संगठनों ने भी चिंता जताई है और निष्पक्ष जांच तथा नागरिक अधिकारों की सुरक्षा की मांग की है।

प्रतिबंध, गिरफ्तारी और बढ़ते राजनीतिक आरोप

इस महीने की शुरुआत में PoK प्रशासन ने JAAC को आतंकवाद-रोधी कानून के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया। इसके बाद कई नेताओं की गिरफ्तारी की खबरें सामने आईं। JAAC का आरोप है कि आंदोलन को दबाने के लिए नेताओं और समर्थकों पर सख्ती की जा रही है। संगठन का यह भी कहना है कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने से आम लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं प्रशासन इन आरोपों को स्वीकार नहीं करता और सुरक्षा कारणों का हवाला देता है।

अंतरराष्ट्रीय निगरानी की मांग, बढ़ी वैश्विक चर्चा

JAAC ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया, मानवाधिकार संगठनों तथा वैश्विक संस्थाओं से पूरे घटनाक्रम पर नजर रखने की अपील की है। संगठन का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान किसी भी प्रकार की हिंसा या दमन की स्वतंत्र निगरानी होनी चाहिए। हाल के घटनाक्रम के बाद PoK की स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में है। हालांकि पाकिस्तान सरकार ने इस पूरे मामले को अपना आंतरिक विषय बताते हुए बाहरी हस्तक्षेप की आवश्यकता से इनकार किया है।

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