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Alwar: हंस सरोवर के डूब क्षेत्र में EV चार्जिंग स्टेशन पर घमासान, विभागीय नोटिस ने खड़े किए नए सवाल

अलवर के ऐतिहासिक हंस सरोवर के डूब क्षेत्र में प्रस्तावित ईवी (EV) चार्जिंग स्टेशन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। निर्माण कार्य रोकने के लिए जल संसाधन विभाग की ओर से जारी नोटिस में ही गंभीर खामियां सामने आने के बाद विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों का आरोप है कि संवेदनशील कैचमेंट एरिया में निर्माण रोकने के बजाय केवल औपचारिक कार्रवाई की गई, जबकि अब इस पूरे मामले को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) तक ले जाने की तैयारी शुरू हो चुकी है।

डूब क्षेत्र में निर्माण को लेकर उठे सवाल

अलवर के हंस सरोवर के कैचमेंट एरिया में 50 इलेक्ट्रिक बसों के लिए ईवी चार्जिंग स्टेशन का निर्माण विवादों में आ गया है। पर्यावरणविदों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जलभराव वाले क्षेत्र में स्थायी निर्माण से सरोवर की प्राकृतिक संरचना और जल संरक्षण प्रणाली प्रभावित हो सकती है। उनका आरोप है कि परियोजना शुरू होने से पहले पर्यावरणीय पहलुओं और नियमों का पर्याप्त पालन नहीं किया गया। इसी कारण अब इस पूरे प्रोजेक्ट की वैधता और प्रशासनिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

नोटिस में विभाग का नाम नहीं, बढ़ी विभागीय भूमिका पर चर्चा

विवाद उस समय और बढ़ गया जब जल संसाधन विभाग द्वारा निर्माण रोकने के लिए जारी नोटिस में संबंधित अधिकारी के विभाग का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिला। इस चूक को लेकर विभिन्न पक्ष सवाल उठा रहे हैं कि यदि निर्माण नियमों के विपरीत था तो संबंधित एजेंसियों और प्रशासन को स्पष्ट रूप से कार्रवाई के लिए क्यों नहीं लिखा गया। जानकारों का मानना है कि ऐसे मामलों में नोटिस की भाषा और प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि आगे की कानूनी कार्रवाई उसी आधार पर तय होती है।

NOC और प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जल संसाधन विभाग जलाशयों और कैचमेंट क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बजाय अन्य प्रशासनिक कार्यों में अधिक सक्रिय दिखाई देता है। उनका कहना है कि यदि समय रहते संबंधित विभागों के बीच समन्वय होता तो विवाद की स्थिति पैदा नहीं होती। हालांकि, इन आरोपों पर विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। संबंधित अधिकारियों से संपर्क की कोशिश भी सफल नहीं हो सकी।

NGT जाने की तैयारी में पर्यावरण प्रेमी

हंस सरोवर के संरक्षण को लेकर सक्रिय पर्यावरण प्रेमियों ने संकेत दिए हैं कि यदि निर्माण कार्य पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो वे मामले को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में चुनौती देंगे। उनका कहना है कि जलाशयों के कैचमेंट एरिया में निर्माण पर्यावरणीय संतुलन के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। अब सभी की नजर जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की आगामी कार्रवाई पर टिकी है कि वे इस विवाद पर क्या निर्णय लेते हैं और निर्माण कार्य को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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