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PM मोदी के दौरे से भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार, 2030 तक 100 अरब डॉलर का लक्ष्य

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य दोहराया। कारोबारी जगत का मानना है कि यह दौरा व्यापार, निवेश, ऊर्जा, खनिज और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर खोल सकता है।

2030 तक 100 अरब डॉलर व्यापार का साझा लक्ष्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेलबर्न यात्रा के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया ने आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों देशों का लक्ष्य वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना है। ऑस्ट्रेलियाई उद्योग जगत का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत के साथ व्यापार बढ़ाने का यह सबसे उपयुक्त समय है। दोनों देश मुक्त व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग को नई गति देने पर काम कर रहे हैं।

व्यापार समझौते से बढ़ रही कारोबारी संभावनाएं

भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ECTA) के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है। अब दोनों सरकारें व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) पर भी बातचीत कर रही हैं, जिससे सेवाओं, निवेश और व्यापार में मौजूद बाधाओं को और कम किया जा सके। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 24 अरब डॉलर से अधिक दर्ज किया गया, जिसे आने वाले वर्षों में कई गुना बढ़ाने की योजना है।

भारत किन वस्तुओं का करता है निर्यात और आयात

भारत ऑस्ट्रेलिया को पेट्रोलियम उत्पाद, दवाइयां, इंजीनियरिंग सामान, कपड़े, मशीनरी, हीरे और आभूषण जैसे उत्पाद निर्यात करता है। वहीं ऑस्ट्रेलिया से भारत कोयला, सोना, महत्वपूर्ण खनिज, कच्ची कपास और दालों जैसी कृषि वस्तुओं का आयात करता है। ECTA के तहत भारतीय उत्पादों को ऑस्ट्रेलियाई बाजार में लगभग पूरी तरह शुल्क-मुक्त पहुंच मिलने से भारतीय निर्यातकों को बड़ा लाभ मिल रहा है।

रणनीतिक साझेदारी को मिल रही नई मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया सिर्फ व्यापारिक साझेदार नहीं बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोगी भी हैं। ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), रक्षा, तकनीक, शिक्षा और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हैं, जिससे दीर्घकालिक साझेदारी को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

ऑस्ट्रेलियाई उद्योग जगत ने जताया भरोसा

ऑस्ट्रेलिया के कई प्रमुख उद्योगपतियों और निवेशकों ने प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का स्वागत करते हुए कहा कि इससे निवेश और व्यापार को नई दिशा मिलेगी। उनका मानना है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों के लिए बड़े अवसर उपलब्ध करा रहा है। कारोबारियों ने विश्वास जताया कि दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ने से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक विकास और स्थिरता को भी मजबूती मिलेगी।

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