Cyber Crime: ‘आपका बेटा पुलिस की गिरफ्त में है…’ एक व्हाट्सएप कॉल से 50 हजार की ठगी, साइबर अपराधियों का नया तरीका
मध्यप्रदेश के अशोकनगर में साइबर ठगों ने पुलिस अधिकारी बनकर एक रेस्टोरेंट संचालक को झूठी कहानी सुनाकर 50 हजार रुपये की ठगी कर ली। ठग ने पीड़ित को उसके बेटे के खिलाफ कार्रवाई और बदनामी का डर दिखाया। बाद में बेटे से संपर्क होने पर पूरे मामले का खुलासा हुआ। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और लोगों से ऐसे कॉल आने पर सतर्क रहने की अपील की है।
व्हाट्सएप कॉल पर पुलिस अधिकारी बनकर किया ब्लैकमेल
अशोकनगर के सोनी कॉलोनी निवासी 56 वर्षीय रवि कुमार जैन ने कोतवाली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि 5 जुलाई की सुबह उन्हें व्हाट्सएप कॉल आई। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को राजस्थान पुलिस का इंस्पेक्टर बताते हुए दावा किया कि उनका बेटा उदयपुर में कुछ लड़कियों के साथ पकड़ा गया है। आरोपी ने कहा कि यदि तुरंत ढाई लाख रुपये नहीं भेजे गए तो युवक को थाने ले जाकर मीडिया के सामने पेश किया जाएगा। इस तरह उसने पिता को बेटे की बदनामी और भविष्य खराब होने का भय दिखाकर दबाव बनाने की कोशिश की।
घबराहट का फायदा उठाकर ऐंठ लिए 50 हजार रुपये
पीड़ित के अनुसार, अचानक मिली इस सूचना से वह घबरा गए और आरोपी से बेटे को छोड़ने की गुहार लगाने लगे। उन्होंने बताया कि उनके पास तत्काल ढाई लाख रुपये नहीं हैं, लेकिन 50 हजार रुपये की व्यवस्था हो सकती है। इसी दौरान ठग ने फोन कॉल लगातार चालू रखी और दो मोबाइल नंबर तथा एक क्यूआर कोड भेजकर तुरंत भुगतान करने के लिए कहा। डर और मानसिक दबाव में आकर रवि कुमार जैन ने बताए गए खातों में 50 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।
बेटे से बात होते ही सामने आई सच्चाई
राशि भेजने के कुछ देर बाद जब रवि कुमार जैन ने अपने बेटे सौरभ से संपर्क किया तो पता चला कि वह पूरी तरह सुरक्षित अपने उदयपुर स्थित कमरे पर मौजूद है। इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार बन चुके हैं। उन्होंने तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई और बाद में कोतवाली थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दी। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
साइबर ठगी के नए तरीकों से रहें सतर्क
हाल के दिनों में साइबर अपराधी लोगों को डर, लालच या सरकारी कार्रवाई का भय दिखाकर ठगी की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। ऐसे मामलों में ठग खुद को पुलिस, बैंक, बिजली विभाग या अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर तत्काल भुगतान का दबाव बनाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी ऐसे कॉल पर बिना सत्यापन पैसे ट्रांसफर न करें। यदि परिवार के किसी सदस्य के बारे में ऐसी सूचना मिले तो पहले सीधे संबंधित व्यक्ति या स्थानीय पुलिस से संपर्क कर जानकारी की पुष्टि करें। किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक, क्यूआर कोड या भुगतान अनुरोध पर तुरंत सतर्कता बरतना ही सबसे प्रभावी बचाव है।