‘भारत विस्तारवाद में नहीं, साझेदारी में विश्वास रखता है’, इंडोनेशिया की संसद में पीएम मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत विस्तारवाद के बजाय सहयोग, शांति और साझा विकास की नीति पर विश्वास करता है। अपने संबोधन में उन्होंने समुद्री साझेदारी, लोकतांत्रिक मूल्यों और दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को भविष्य की अहम दिशा बताया।
भारत-इंडोनेशिया संबंधों को बताया भरोसे और साझेदारी का आधार
जकार्ता में इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि सदियों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत जुड़ाव पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बना भरोसा और आपसी सद्भाव आने वाले समय में नागरिकों के लिए नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा। प्रधानमंत्री के अनुसार, मजबूत द्विपक्षीय संबंध केवल दोनों देशों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में स्थिरता और विकास के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
‘समुद्र दूरी नहीं, दोनों देशों को जोड़ने वाला पुल’
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में समुद्री सहयोग को भारत-इंडोनेशिया संबंधों की महत्वपूर्ण कड़ी बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के लिए समुद्र कभी भी दूरी का प्रतीक नहीं रहा, बल्कि यह व्यापार, संस्कृति और आपसी संपर्क का माध्यम रहा है। उन्होंने समुद्री सुरक्षा, ब्लू इकोनॉमी और क्षेत्रीय सहयोग को भविष्य की साझा प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी शांति, सुरक्षा और समृद्धि को नई दिशा दे सकती है।
लोकतंत्र और साझा मूल्यों पर दिया विशेष जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया दुनिया के बड़े लोकतांत्रिक देशों में शामिल हैं और दोनों देशों की साझेदारी लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि जब दोनों देश साथ मिलकर आगे बढ़ते हैं तो दुनिया का लोकतंत्र पर विश्वास और मजबूत होता है। उनके अनुसार, लोकतंत्र केवल शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि नागरिकों के लिए अवसर, विश्वास और बेहतर भविष्य का आधार भी है।
रक्षा सहयोग और ऐतिहासिक रिश्तों का किया उल्लेख
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में भारत और इंडोनेशिया के रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई मिलने की बात कही। दोनों देशों के बीच रक्षा, स्वास्थ्य और समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने से जुड़े कई अहम फैसलों की घोषणा की गई। साथ ही उन्होंने गुटनिरपेक्ष आंदोलन की ऐतिहासिक विरासत को याद करते हुए भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और इंडोनेशिया के नेतृत्व द्वारा स्थापित सहयोग की भावना का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देश आज भी उसी साझेदारी की भावना को आगे बढ़ाते हुए क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।