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‘ट्रंप ने रणनीतिक गलती की’, पूर्व अमेरिकी NSA जॉन बोल्टन का दावा; भारत-अमेरिका रिश्तों, बालाकोट और पाकिस्तान पर खुलकर बोले

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जॉन बोल्टन ने भारत-अमेरिका संबंधों, 2019 के भारत-पाकिस्तान तनाव, रूस से तेल खरीद, पाकिस्तान की राजनीति और डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति पर कई अहम टिप्पणियां की हैं। उन्होंने कहा कि भारत-पाकिस्तान तनाव का श्रेय लेने की ट्रंप की कोशिश रणनीतिक रूप से गलत थी। साथ ही उनका मानना है कि भारत पर लगाए गए अतिरिक्त शुल्क जैसी नीतियों ने दोनों देशों के रिश्तों को नुकसान पहुंचाया।

भारत-पाकिस्तान तनाव पर ट्रंप की भूमिका को लेकर उठाए सवाल

एक साक्षात्कार में जॉन बोल्टन ने कहा कि वर्ष 2019 में भारत और पाकिस्तान के बीच पैदा हुए तनाव के दौरान अमेरिका ने दोनों देशों से लगातार संपर्क बनाए रखा था, लेकिन उस समय तत्कालीन अमेरिकी प्रशासन ने इसका सार्वजनिक श्रेय लेने की कोशिश नहीं की थी। उनका कहना था कि बाद में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत-पाकिस्तान तनाव को समाप्त कराने का श्रेय लेने का दावा उचित नहीं था। बोल्टन के अनुसार, भारत और पाकिस्तान ने अपने स्तर पर हालात संभाले थे और अमेरिका की भूमिका केवल संवाद बनाए रखने तक सीमित थी।

रूसी तेल खरीद पर भारत को निशाना बनाने की आलोचना

बोल्टन ने रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत के खिलाफ अपनाई गई अमेरिकी नीति की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि भारत पर अपेक्षाकृत अधिक आर्थिक दबाव डालने से दोनों देशों के रणनीतिक संबंध प्रभावित हुए। उनके अनुसार, यदि किसी नीति का असर केवल एक साझेदार देश पर अधिक पड़े, तो उससे दीर्घकालिक विश्वास कमजोर हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी नीतियां भारत को वैकल्पिक रणनीतिक साझेदारों की ओर देखने के लिए प्रेरित कर सकती हैं, हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत-अमेरिका संबंधों की मजबूत बुनियाद भविष्य में इन मतभेदों को पीछे छोड़ सकती है।

पाकिस्तान की राजनीति और सेना की भूमिका पर टिप्पणी

पाकिस्तान के मौजूदा राजनीतिक हालात पर बोल्टन ने कहा कि वहां सेना का प्रभाव लंबे समय से बना हुआ है और वर्तमान स्थिति में यह पहले से अधिक स्पष्ट दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की नीति हमेशा लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकारों के साथ काम करने की रही है, लेकिन पाकिस्तान में राजनीतिक व्यवस्था को लेकर कई चुनौतियां बनी हुई हैं। उनके अनुसार, देश की सत्ता संरचना में सेना की भूमिका कोई नई बात नहीं है, हालांकि अब यह पहले की तुलना में अधिक खुलकर दिखाई दे रही है।

ट्रंप की विदेश नीति और ‘इंडो-पैसिफिक’ नाम पर भी जताई राय

डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति पर टिप्पणी करते हुए बोल्टन ने कहा कि कई फैसलों में दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टिकोण की कमी दिखाई दी। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका द्वारा ‘यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड’ के नाम से ‘इंडो’ शब्द हटाने का फैसला उन्हें उचित नहीं लगा। उनके मुताबिक, भारत और पाकिस्तान को अलग-अलग रणनीतिक नजरिए से देखने की नीति अमेरिका के हित में रही है और इसी सोच ने दोनों देशों के साथ स्वतंत्र संबंध विकसित करने में मदद की। बोल्टन का मानना है कि भविष्य में इस तरह के फैसलों पर पुनर्विचार किया जा सकता है।

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